Defence: सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला, रक्षा खरीद को मिली मंजूरी  

Updated at : 27 Mar 2026 7:45 PM (IST)
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Defence: सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला, रक्षा खरीद को मिली मंजूरी  

डीएसी ने शुक्रवार को 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों की मंजूरी दी है. इससे थलसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के लिए आधुनिक हथियार और सिस्टम शामिल है.

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Defence: रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई जिसमें देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गयी. इन प्रस्तावों को ‘स्वीकृति आवश्यकता’ (एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी-एओएन) के तहत मंजूरी दी गई है. डीएसी, सशस्त्र बलों के लिए सैन्य साजो-सामान की खरीद की सैद्धांतिक मंजूरी देती है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में हुई यह बैठक ऐतिहासिक रही क्योंकि चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है जो किसी भी एक साल में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है. इसी कड़ी में सेना को ‘धनुष’ और ‘आकाशतीर’ जैसे हथियार देने की योजना है.

शुक्रवार को हुई बैठक में थलसेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद, हाई कैपेसिटी रेडियो रिले, धनुष गन सिस्टम और रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरणों को मंजूरी दी गई है. एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम रियल-टाइम एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग क्षमता प्रदान करेगा, जबकि हाई कैपेसिटी रेडियो रिले भरोसेमंद और निर्बाध संचार सुनिश्चित करेगा.

धनुष गन सिस्टम से तोपखाने की मारक क्षमता और सटीकता में वृद्धि होगी, जिससे सेना विभिन्न भू-भागों में लंबी दूरी तक लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से भेद सकेगी. वहीं, रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम सेना की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करेगा. आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद एंटी-टैंक हथियारों की घातक क्षमता को बढ़ायेगा..

वायुसेना के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट और Su-30 इंजन के ओवरहॉल से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पुराने एएन-32 और आईएल -76 बेड़े की जगह लेकर सामरिक और परिचालन एयरलिफ्ट जरूरतों को पूरा करेगा.

हवाई खतरों से करेगी रक्षा 

एस-400 प्रणाली दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई खतरों से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रक्षा करेगी. वहीं, रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट के जरिए आक्रामक अभियानों के साथ-साथ खुफिया, निगरानी और टोही मिशन को भी अंजाम दिया जा सकेगा.एसयू-30 इंजन के ओवरहॉल से विमानों की सेवा आयु बढ़ेगी और उनकी ऑपरेशनल क्षमता बनी रहेगी.

भारतीय तटरक्षक बल के लिए हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स को मंजूरी दी गई है.  इसका उपयोग तटीय गश्त, खोज एवं बचाव अभियान, जहाजों की सहायता और लॉजिस्टिक्स परिवहन जैसे बहुउद्देश्यीय कार्यों में किया जायेगा. इन निर्णयों से देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलने के साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बल मिलेगा.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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