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कश्मीर से कन्याकुमारी तक आस्था पर भी लॉकडाउन, मंदिर खुले लेकिन आमदनी बंद

By Prabhat Khabar Digital Desk
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 लॉकडाउन के कारण  आम आदमी ही नहीं भगवान के मंदिरों के लिए भी आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है.
लॉकडाउन के कारण आम आदमी ही नहीं भगवान के मंदिरों के लिए भी आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है.
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कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने के लिए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और फिर 24 मार्च से लॉकडाउन के कारण आम आदमी ही नहीं भगवान के मंदिरों के लिए भी आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है. लॉकडाउन 4.0 में जरूर कुछ रियायतें दी गयीं हैं लेकिन धार्मिक कार्यकर्मों और मंदिरों में दर्शन पर अभी भी रोक है. देश के कई मंिदरों की कमाई एक माह में करोड़ों रुपये की कमाई होती थी लेकिन अब वो बंद है.

लॉकडाउन के कारण कई सारे धार्मिक त्योहार भी उस रंग रूप में नहीं मनाए गए जिसके लिए वो जाने जाते थे. बता दें कि लॉकडाउन-04 अब 31 मई तक लागू रहेगा. 31 मई तक देशभर में धार्मिक स्थल बंद रहेंगे और सभी सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगी रहेगी.

ईद पर लॉकडाउन का असर

इसी सप्ताह 22 मई को वट सावित्रि व्रत है और उम्मीद है कि 26 मई को ईद पड़ रही है. ईद लॉकडाउन में हीमनाई जाएगी. इस दौरान किसी को भी ईदगाह या मस्जिद में जमा होने की इजाजत नहीं होगी. इस बार ईद पर एक साथ नमाज अदा नहीं कर पायेंगे. वहीं, इस बार महिलाएं वट सावित्रि की पूजा बरगद के पेड़ के पास नहीं कर पाएंगी. वट सावित्रि पूजा अपने-अपने घरों में ही करना पड़ेगा.

दान के अभाव में मंदिरों की आर्थिक स्थिति खराब

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा सहित पहाड़ों पर मौजूद सारे मंदिर खुल गए हैं, लेकिन यहां हर साल श्रद्धालुओं का जो जमघट होता है, वो लॉकडाउन के कारण नदारद है. उत्तराखंड सरकार लोगों से पर्यटन को बढावा देने के लिए सुझाव मांग रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिरों में दान की आवक ना होने के कारण सरकार से मांग की जा रही है कि इनके बिजली बिल माफ किए जाएं. हिंदू की खबर के मुताबिक, तमिलनाडु में ऐसे हजारों मंदिरों में होने वाली सेवाएं जो पहले दिनभर में 2 से 5 बार होती थीं, अब एक बार ही हो पा रही हैं. दान के अभाव में इन मंदिरों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. कई धार्मिक शहर लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए हैं. इनमें उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, मप्र के उज्जैन, महाराष्ट्र के नासिक, यूपी के वाराणसी-अयोध्या , बिहार के गया, झारखंड के बाबाधाम जैसे कई शहर शामिल हैं.

तमिलनाडुः पुजारियों को एक हजार रुपए की राहत, तिरुपति बालाजी मंदिर बेच रहा लड्डू

तमिलनाडु में मंदिरों की खस्ता हालत को देखते हुए सरकार ने करीब 65 हजार ग्रामीण पुजारियों को एक-एक हजार रुपए की राहत राशि दी है. राहत की राशि बढाने की मांग हो रही है. आंध्र प्रदेश स्थित अमीर मंदिरों में से एक तिरुपति बालाजी मंदिर को 20 मार्च को बंद कर दिया गया था. श्री वेंकटेश्वर मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने अब मंदिर के प्रसाद यानी लड्डुओं को 50 फीसदी छूट पर बेचना शुरु कर दिया है. मंदिर का ये प्रसाद चेन्नई के अलावा, बेंगलूरू, हैदराबाद के साथ आंध्र प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में उपलब्ध होगा.

इन-इन जगहों पर बुरा असर

वैष्णो देवी मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या साई बाबा मंदिर ट्रस्ट , देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, महाराष्ट्र के नासिक, मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले उज्जैन, हरिद्वार से 400 किमी आगे तक उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे बड़े तीर्थ, झारखंड के बाबाधाम और रजरप्पा मंदिर, बिहार के गया स्थित या कुंड से विष्णु मंदिर तक सन्नाटा ही है. ये उन जगहों के नाम है जिस कारण उस शहर की पहचान है. उस शहर में आय के सबसे बड़ा कारण ये मंदिर ही है. ऐसे हालात में जब पर्यटक नहीं आ रहे तो उस शहर की आर्थिक व्यवस्था अब चरमरा सी गयी है.

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