केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा, लॉक डाउन का सख्ती से पालन करवायें

Center asked state governments to strictly follow lock down : केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बंद (लॉकडाउन) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें.
नयी दिल्ली : केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बंद (लॉकडाउन) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई. केंद्र और राज्य सरकारों ने रविवार को देश भर के ऐसे 80 जिलों को 31 मार्च तक पूर्ण बंद करने का फैसला किया था जहां कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आए हैं.
खतरनाक कोविड-19 के प्रसार को रोकने के मद्देनजर यह सहमति बनी थी कि गैर जरूरी यात्री परिवहन को तत्काल प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है.दिल्ली में 23 मार्च सुबह छह बजे से 31 मार्च की मध्यरात्रि तक बंदी रहेगी. कुछ अन्य प्रदेशों ने भी बंद को लागू किया है. बंद के दौरान दिल्ली की सीमाएं सील रहेंगी, हालांकि स्वास्थ्य, खाद्य सामग्री, पानी और बिजली आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी. बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये डीटीसी की 25 प्रतिशत बसें भी सड़कों पर रहेंगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इससे पहले राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोरोना वायरस के बंद से जुड़े नियम-कायदों का सख्ती से पालन हो, क्योंकि उन्होंने यह नोट किया कि बहुत से लोग इन उपायों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “लॉकडाउन को कई लोग अब भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.कृपया करके अपने आप को बचायें, अपने परिवार को बचायें, निर्देशों का गंभीरता से पालन करें.राज्य सरकारों से मेरा अनुरोध है कि वे नियम और कानूनों का पालन करवाएं.”
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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