सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म बदलते ही खत्म होगा SC का दर्जा
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 24 Mar 2026 11:52 AM
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दलित व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है, तो वह SC कैटेगरी से बाहर हो जाता है. धर्म बदलने के बाद कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति के लोगों को मिलने वाले कानूनी फायदे नहीं ले सकता है. जस्टिस पीके मिश्रा और एनवी अंजारिया की बेंच ने यह साफ किया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग ही SC का दर्जा पा सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति ईसाई या किसी और धर्म में जाता है, तो उसका SC स्टेटस खत्म हो जाएगा. कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता. किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है.
The Supreme Court has ruled that a person who professes a religion other than Hinduism, Sikhism or Buddhism cannot be recognised as a member of a Scheduled Caste.
— ANI (@ANI) March 24, 2026
A bench of Justices P. K. Mishra and N. V. Anjaria ruled that conversion to any other religion results in the loss…
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पहले के फैसले को सही ठहराया . इसमें कहा गया था कि जो लोग ईसाई धर्म अपना लेते हैं और सक्रिय रूप से उसका पालन करते हैं, वे अपना अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा बरकरार नहीं रख सकते.
…तो SC का दर्जा अपने आप खत्म हो जाएगा
barandbench.com के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई दलित व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, तो वह SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत केस नहीं कर सकता. कोर्ट ने साफ कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी और धर्म को मानने वाला व्यक्ति SC में नहीं गिना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में जाता है, तो उसका SC का दर्जा अपने आप खत्म हो जाएगा.
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यह फैसला एक पादरी चिंथाडा आनंद की अपील पर सुनाया गया. इसमें उन्होंने मई 2025 में आए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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