CJI BR Gavai Farewell Speech: 23 नवंबर को रिटायर होंगे CJI बी आर गवई, जानें फेयरवेल स्पीच में क्या बोले
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 21 Nov 2025 7:36 AM
CJI बी आर गवई
CJI BR Gavai Farewell Speech: भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बी आर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. इससे पहले उन्होंने अपने फेयरवेल स्पीच में कहा कि वह बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, लेकिन वह वास्तव में एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं जो सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं.
CJI BR Gavai Farewell Speech: ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (SCAORA) द्वारा आयोजित एक विदाई समारोह में बोलते हुए, सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि देश की न्यायपालिका ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, और शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट में उनका आखिरी कार्य दिवस होगा.
मैं धर्मनिरपेक्ष हूं : सीजेआई बी आर गवई
सीजेआई बी आर गवई ने कहा, “मैं बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन मुझे धार्मिक पढ़ाई या धर्म से जुड़ी गहरी जानकारी ज़्यादा नहीं है. मैं वास्तव में धर्मनिरपेक्ष हूं और मैं हिंदू धर्म, सिख धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, सबमें विश्वास रखता हूं. मैंने यह अपने पिता से सीखा है. वह धर्मनिरपेक्ष और डॉ आम्बेडकर के अनुयायी थे. बड़े होते हुए, जब हम उनके साथ राजनीतिक समारोहों में जाते थे और उनके दोस्त कहते थे, ‘यहां आओ, यहां की दरगाह प्रसिद्ध है, या यहां का गुरुद्वारा प्रसिद्ध है’, तो हम जाते थे.”
डॉ आम्बेडकर और संविधान की वजह से सीजेआई के पद तक पहुंचा : गवई
सीजेआई गवई ने कहा कि वह केवल डॉ आम्बेडकर और संविधान की वजह से ही इस वर्तमान पद तक पहुंच पाए. उन्होंने कहा, “अन्यथा, मुझे नहीं लगता कि किसी नगरपालिका के स्कूल में जमीन पर बैठकर पढ़ने वाला कोई भी लड़का कभी इसका सपना देख सकता था. मैंने भारतीय संविधान के चार आधारभूत सिद्धांतों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के अनुसार जीने की कोशिश की है.”
सुप्रीम कोर्ट को केवल सीजेआई-केंद्रित अदालत नहीं होना चाहिए : गवई
सीजेआई गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को केवल सीजेआई-केंद्रित अदालत नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी न्यायाधीशों का न्यायालय होना चाहिए. उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट एक बहुत बेहतरीन संस्था है. जब तक न्यायाधीशों, बार, रजिस्ट्री और कर्मचारियों सहित सभी हितधारक मिलकर काम नहीं करते, अदालत कार्य नहीं कर सकती. जहां बार की समस्याओं की बात है, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एससीएओआरए को हमेशा साथ लिया जाना चाहिए.”
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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