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सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली चीन की काली करतूतों की पोल, भारतीय सैनिकों के डर से पैंगोंग झील पर बना रहा पुल

चीन द्वारा पैंगोंग झील पर पुल के निर्माण से संबंधित जो तस्वीरें सामने आई हैं, वह कोई आम सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि लद्दाख में चीन की काली करतूतों का ब्लैक एंड व्हाइट सबूत हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
पैंगोंग झील की सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें
पैंगोंग झील की सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें
फोटो : ट्विटर

नई दिल्ली : भारत के हाथों लगातार शिकस्त खाने के बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. वह पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी समेत पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं पर लगातार निर्माण कार्य कर रहा है, लेकिन सैटेलाइट की तस्वीरों ने उसकी काली करतूतों की पोल खोल दी है कि वह भारतीय सैनिकों के डर से पैंगोंग झील पर पुल बना रहा है. सैटेलाइट की ये तस्वीरें लद्दाख में पैंगोंग झील पर पुल के निर्माण से संबंधित है. चीन लगातार झूठ बोलता रहा है कि वह भारत की सीमाओं में निर्माण कार्य नहीं करा रहा है, लेकिन पैंगोंग झील पर निर्माण कार्य की सैटेलाइट तस्वीरों ने उसकी पोल पूरी तरह से खोल कर रख दी है.

सैटेलाइट की इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद यह साफ हो गया है कि वह भारत-चीन के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन कर अतिक्रमण कर रहा है. मीडिया की रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि पैंगोंग झील पर पुल के निर्माण से यह साफ हो जाता है कि वह भारत के साथ दुश्मनी मोल ले रहा है.

आठ मीटर चौड़ा और 315 मीटर लंबा है पुल

चीन द्वारा पैंगोंग झील पर पुल के निर्माण से संबंधित जो तस्वीरें सामने आई हैं, वह कोई आम सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि लद्दाख में चीन की साजिशों के ब्लैक एंड व्हाइट सबूत हैं. चीन पैंगोंग झील पर एक पुल का अवैध निर्माण करने में जुटा है, जो 8 मीटर चौड़ा और 315 मीटर लंबा है. 16 जनवरी को सैटेलाइट के जरिए उतारी गईं इन तस्वीरों से साफ पता चलता है कि पुल निर्माण में लगे चीनी मजदूर और इंजीनियर एक भारी क्रेन की मदद से कंक्रीट स्लैब और खंभों को जोड़ने का काम कर रहे हैं.

60 साल से चीन का है अवैध कब्जा

सैटेलाइट तस्वीर में दिख रहा है कि पैंगोंग झील के नॉर्थ बैंक को साउथ बैंक से जोड़ने वाला ये पुलस उस क्षेत्र में बन रहा है, जिस पर चीन ने 1958 से अवैध तरीके से कब्जा जमा रखा है. इस पुल के निर्माण को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि इस पुल का निर्माण उन इलाकों में किया जा रहा है, जहां करीब 60 साल से चीन का अवैध कब्जा है. भारत ने इस तरह के अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है.

चार महीने में बनाया गया पुल

इन सैटेलाइट तस्वीरों और यूरोपियन स्पेस एजेंसी की तस्वीरों से मैच करने पर पता चलता है कि चीन ने पैंगोंग झील के नॉर्थ बैंक से पिछले साल सितंबर में इस पुल के निर्माण का काम शुरू किया था. चार महीने में ही ये पुल लगभग बनकर तैयार हो चुका है. साउथ बैंक की तरफ पुल का सिर्फ कुछ मीटर निर्माण कार्य ही बाकी बचा है. इस पुल के निर्माण के पीछे चीन की मंशा भी साफ जाहिर है. इसे 2020 में भारत के साथ हुए तनाव के दौरान भारतीय सेना की तैयारियों और स्ट्रैटजिक लोकेशन के तोड़ के रुप में देखा जा रहा है.

भारतीय सैनिकों से डरकर पुल बना रहा है चीन

विशेषज्ञों का मानना है कि पैंगोंग में चीन का ये पुल सितंबर 2020 में पैंगोंग झील के दक्षिणी तट में कैलाश की चोटी पर कब्जा करने के भारतीय सेना का आक्रामक कदम का सीधा जवाब है. उस समय चीनी सैन्य तैनाती को भारतीय सेना से काफी खतरा महसूस हो रहा था, जिसके कारण उन्हें अन्य स्थानों से सैनिकों को वापस लाकर झील के आसपास के इलाके में तैनात करने पर मजबूर होना पड़ा था.

चीनी सैनिकों को हथियार पहुंचाने में मदद करेगा नया पुल

इन हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरों में दिखाया गया है कि पैंगोंग लेक पर चीन का नया पुल उस क्षेत्र में चीनी सेना को बेहतर लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराएगा और चीन को झील के किसी भी किनारे से सैनिकों को जल्द जुटाने की क्षमता देगा. नॉर्थ बैंक के सैनिकों को अब अपने बेस तक पहुंचने के लिए पैंगोंग झील के आसपास लगभग 200 किलोमीटर ड्राइव करने की आवश्यकता नहीं होगी. ये सफर अब करीब 150 किमी कम हो जाएगा.

चीन की हरकत पर भारत की पैनी नजर

भारत सरकार भी मानती है कि चीन का ये पुल लद्दाख में एलएसी पर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का जवाब है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा भारत ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बजट में काफी वृद्धि की है और पहले से कहीं अधिक सड़कों और पुलों का काम पूरा किया है. ये कोई पहली बार नहीं जब चीन ने एलएसी पर अवैध निर्माण किया है. गलवान से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन की चालबाजियों के सेटेलाइट सबूत सामने आते ही रहते हैं.

पहले भी पंगा लेता रहा है चीन

ऐसा पहली बार नहीं है जब चीन की हरकतों का खुलासा सेटेलाइट तस्वीरों ने किया है. दरअसल चीन खुद को बड़ा शातिर समझता है. लद्दाख में गतिरोध के बाद जबसे चीजें सामान्य होनी शुरु हुई हैं तभी से चीन नई साजिशें रचने में जुटा है. लद्दाख में जिस हिस्से के लिए समझौता हुआ है उससे ठीक सटाकर चीन ने स्थाई निर्माण शुरू कर दिया है. पिछले महीने सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला था कि भारत के साथ समझौते के बावजूद चीन ने पैंगोंग झील से सटे इलाके में पक्का निर्माण कर लिया है.

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