CCTV in Police Stations : पुलिस हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लिया स्वतः संज्ञान

Updated:
विज्ञापन
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट

CCTV in Police Stations : सुप्रीम कोर्ट ने थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी संबंधी खबर पर स्वत: संज्ञान लिया. अखबार में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान शीर्ष कोर्ट ने लिया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में यह अनिवार्य किया था कि लगाए गए सीसीटीवी सिस्टम में नाइट विजन की सुविधा हो. सीसीटीवी आवाज और वीडियो दोनों का रिकॉर्ड जरूर रखे.

विज्ञापन

CCTV in Police Stations :  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी से जुड़ी एक खबर पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि खबर के अनुसार, इस साल राजस्थान में पुलिस हिरासत में 11 लोगों की मौत हो गई. barandbench.com की खबर के अनुसार, एक अखबार में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 7 से 8 महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “अखबार की रिपोर्ट के आधार पर हम पुलिस स्टेशनों में लगे सीसीटीवी की कमी पर स्वतः संज्ञान में जनहित याचिका दर्ज कर रहे हैं, क्योंकि रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में पिछले 7-8 महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं.”

पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी

पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाना सुप्रीम कोर्ट ने खुद 2020 में अनिवार्य कर दिया था. यह फैसला जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक निर्णय में लिया गया था. उस फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया था कि देशभर के हर पुलिस स्टेशन में नाइट विजन वाले सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं.

यह भी पढ़ें : आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आठ साल की बच्ची हुई इतनी खुश कि पहुंच गयी मंदिर, पहाड़ी बाबा को ऐसे किया प्रसन्न

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया था कि सीबीआई (CBI), एनआईए (NIA), ईडी (ED), एनसीबी (NCB), डीआरआई (DRI), एसएफआईओ (SFIO) और उन सभी केंद्रीय एजेंसियों के दफ्तरों में जहां लोगों से पूछताछ की जाती है, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश की चर्चा काफी हुई थी.

विज्ञापन
अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : [email protected]

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola