सीबीआई का ‘ऑपरेशन चक्र-V’: 21000 सिम कार्ड वाली ‘फिशिंग फैक्ट्री’ का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार

साइबर क्राइम के खिलाफ सीबीआई की बड़ी कार्रवाई.
CBI Dismantles Phishing SMS Factory: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ऑपरेशन चक्र-V के तहत फिशिंग फैक्ट्री का खुलासा किया है, जो साइबर अपराधियों को फर्जी एसएमएस और अन्य मैसेज भेजने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते थे. सीबीआई ने कहा है कि इस कंपनी ने फर्जीवाड़ा करके 21 हजार सिम कार्ड हासिल किये और उसकी मदद से भोले-भाले लोगों को साइबर ठगी के जाल में फंसाया गया.
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CBI Dismantles Phishing SMS Factory: संगठित साइबर अपराध की कमर तोड़ने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई लगातार जारी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म करने के लिए ऑपरेशन चक्र-V की शुरुआत की है. इसके तहत एक विशाल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को सीबीआई ने ध्वस्त किया है. यह नेटवर्क देश भर में लाखों लोगों से ठगी करने के लिए फिशिंग संदेश भेजने का तकनीकी आधार बन गया था. सीबीआई ने गिरोह के 3 मुख्य आरोपियों सोनवीर सिंह, मनीष उपरेती और हिमालय को गिरफ्तार किया है. ऑपरेशन चक्र-V के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, बेहिसाब नकदी और क्रिप्टोकरेंसी भी एजेंसी ने जब्त की है.
एनसीआर और चंडीगढ़ से चल रहा था रैकेट
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया है कि यह रैकेट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और चंडीगढ़ से संचालित हो रहा था. इसे ‘फिशिंग एसएमएस फैक्ट्री’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. सीबीआई ने बताया है कि एजेंसी ने 21000 सिम कार्ड जब्त किये हैं. ये सिम कार्ड दूरसंचार विभाग के नियमों का उल्लंघन करते हुए गिरोह ने हासिल किये थे. इनका इस्तेमाल थोक में धोखाधड़ी वाले संदेश भेजने के लिए किया जा रहा था.

CBI Dismantles Phishing SMS Factory: देश-विदेश के साइबर क्रिमिनल को मिल रही थी ‘फिशिंग फैक्ट्री’ की मदद
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा है कि यह संगठित साइबर गिरोह न केवल घरेलू अपराधियों को थोक एसएमएस सेवाएं प्रदान कर रहा था, बल्कि विदेशी साइबर अपराधी भी भारतीय नागरिकों को ठगने के लिए इस सेवा का लाभ ले रहे थे. सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ सहित कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद इस गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त किया.
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इस तरह से धोखाधड़ी कर रहे थे साइबर क्रिमिनल्स
सीबीआई के मुताबिक, इस नेटवर्क का उपयोग फर्जी डिजिटल गिरफ्तारी, ऋण घोटाले और निवेश धोखाधड़ी जैसी विभिन्न साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाता था. टेलीकॉम कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. शुरुआती जांच से पता चला है कि कुछ दूरसंचार कंपनियों के चैनल पार्टनर्स और उनके कर्मचारियों की संलिप्तता भी हो सकती है, जिन्होंने इस धोखाधड़ी के लिए अवैध रूप से सिम कार्ड की व्यवस्था करने में मदद की.
सीबीआई की कार्रवाई और बरामदगी
सीबीआई ने DoT के साथ मिलकर और ‘संचार साथी’ पोर्टल से प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए मेसर्स लॉर्ड महावीरा सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया. कंपनी पर आरोप है कि यह एक अवैध सिस्टम चला रही थी, जो धोखेबाजों को पूरे भारत में बड़ी संख्या में फर्जी संदेश भेजने की अनुमति देता था.

दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में ली गयी तलाशी
सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में तलाशी के दौरान फिशिंग संदेश भेजने के लिए उपयोग किये जाने वाले एक पूर्ण और सक्रिय सिस्टम को जब्त किया. यहां से बरामद उपकरणों में सर्वर, संचार उपकरण, यूएसबी हब, डोंगल और हजारों सिम कार्ड शामिल थे. इस सेटअप का उपयोग करके रोजाना लाखों लोगों को धोखाधड़ी के लिए संदेश भेजे जा रहे थे.
लोगों को ठगने की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
यह गिरोह मुख्य रूप से फर्जी बल्क मैसेजिंग सेवाएं प्रदान करके साइबर अपराधियों के लिए टेक्निकल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करता था. यह भी जान लीजिए कि साइबर क्रिमिनल्स भोले-भाले लोगों से किस तरह से ठगी करते थे.
- अवैध तरीके से सिम कार्ड का संग्रह : लगभग 21,000 सिम कार्ड अवैध रूप से प्राप्त हासिल किये, जिसकी मदद से ठगी करते थे. संभवतः इसमें टेलिकॉम चैनल पार्टनर्स भी उनकी मदद करते थे.
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कंट्रोल : इन हजारों सिम कार्ड को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नियंत्रित किया जाता था.
- बल्क एसएमएस भेजना : इस मंच का उपयोग करके लाखों संदेश हर दिन भेजे जाते थे.
- फर्जी ऑफर : भोले-भाले लोगों को ऋण, निवेश के अवसर और अन्य वित्तीय लाभ का लालच देकर ठगते थे.
- डेटा चोरी : इन संदेशों का अंतिम उद्देश्य पीड़ितों के व्यक्तिगत और बैंकिंग विवरण चुराना था, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी की जा सके.
- मुख्य धोखाधड़ी : लोगों का विवरण हासिल करने के बाद उसका उपयोग डिजिटल अरेस्ट, ऋण घोटाले या निवेश घोटाले जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जाता था.
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By Mithilesh Jha
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