Cabinet: छोटे शहरों में भी अब बनेगा एयरपोर्ट, दुर्गम इलाकों में बनेंगे हेलीपैड

Updated at : 25 Mar 2026 7:59 PM (IST)
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Cabinet: छोटे शहरों में भी अब बनेगा एयरपोर्ट, दुर्गम इलाकों में बनेंगे हेलीपैड

Cabinet: देश में हवाई यात्रा की पहुंच का दायरा बढ़ाने, इमिग्रेशन सिस्टम और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए मॉडिफाइड उड़ान योजना को मंजूरी दी. यह […]

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Cabinet: देश में हवाई यात्रा की पहुंच का दायरा बढ़ाने, इमिग्रेशन सिस्टम और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए मॉडिफाइड उड़ान योजना को मंजूरी दी. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक के लिए है. इस योजना पर 28840 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. योजना से  टियर-2 और टियर-3 शहरों का आर्थिक विकास होगा. साथ ही पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. आम लोगों को सस्ता हवाई सफर करने का मौका मिलेगा. मॉडिफाइड उड़ान योजना के तहत देश में 100 एयरपोर्ट का विकास किया जायेगा. इसके लिए अगले 8 साल में 12159 करोड़ रुपये खर्च होगा. एक एयरपोर्ट पर औसतन 100 करोड़ रुपये खर्च होगा. 


विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार की कोशिश देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है ताकि एविएशन के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके. एयरपोर्ट का संचालन और रखरखाव महंगा होता है, इसे देखते हुए केंद्र सरकार हर एयरपोर्ट को तीन साल के लिए 3.06 करोड़ रुपये देगी जबकि हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम के लिए 0.90 करोड़ रुपये देगी. इस पर लगभग 2577 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. पहाड़ी, दुर्गम और आकांक्षी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की चुनौती दूर करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा और इसके लिए हर हेलीपैड के निर्माण के लिए 1.5 करोड़ रुपये दिया जाएगा. 


हेलीपैड के निर्माण के लिए अगले 8 साल तक 3661 करोड़ देने को मंजूरी दी गयी है. रीजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत एयरलाइन संचालकों को वायबिलिटी गैप फंडिंग के तहत वित्तीय सहायता दी जाती है. इसके लिए सरकार ने 10 साल के लिए 10043 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. 


आत्मनिर्भरता पर है फोकस

दुर्गम और जटिल भौगोलिक क्षेत्र में छोटे एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर की कमी को दूर करने के लिए पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और दो एचएएल डोर्नियर एयरक्राफ्ट एलायंस खरीदने को मंजूरी दी है. गौरतलब है कि उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में लागू की गयी थी. मौजूदा समय में इस योजना के तहत 95 एयरपोर्ट से 663 रूट पर संचालन हो रहा है. यही नहीं योजना शुरू होने के बाद 28 फरवरी 2026 तक 3.41 लाख हवाई जहाज का संचालन किया गया है और लगभग 1.62 करोड़ से अधिक यात्रियों से सफर किया है. इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट ने विदेशियों की वीजा प्रक्रिया और रजिस्ट्रेशन को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए 

‘इमीग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग’ (आईवीएफआरटी 3.0) योजना को अगले पांच साल तक  1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी. इस मद के लिए 1800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वैश्विक पर्यावरण लक्ष्य को हासिल करने के लिए पेरिस समझौते के तहत सरकार ने ‘नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन’ को मंजूरी दी. इससे वैश्विक मंच पर भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धताओं को बल मिलेगा.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

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