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नीरव मोदी मामले की रिपोर्टिंग पर रोक के अनुरोध वाली याचिका ब्रिटिश अदालत ने की खारिज

Updated at : 07 Sep 2020 10:47 PM (IST)
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नीरव मोदी मामले की रिपोर्टिंग पर रोक के अनुरोध वाली याचिका ब्रिटिश अदालत ने की खारिज

लंदन : पंजाब नेशनल बैंक (PNB Scam) से करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) के प्रत्यर्पण के मुकदमे की सुनवाई कर रहे ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने सुनवाई की रिपोर्टिंग पर आंशिक रोक लगाने का अनुरोध करने वाले एक आवेदन को खारिज कर दिया. इस मुकदमे की पांच दिन की सुनवाई सोमवार को अदालत में शुरू हो गई. जिला न्यायाधीश सैम्युल गूजी ने दलीलें सुनने के बाद आवेदन को खारिज कर दिया.

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लंदन : पंजाब नेशनल बैंक (PNB Scam) से करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) के प्रत्यर्पण के मुकदमे की सुनवाई कर रहे ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने सुनवाई की रिपोर्टिंग पर आंशिक रोक लगाने का अनुरोध करने वाले एक आवेदन को खारिज कर दिया. इस मुकदमे की पांच दिन की सुनवाई सोमवार को अदालत में शुरू हो गई. जिला न्यायाधीश सैम्युल गूजी ने दलीलें सुनने के बाद आवेदन को खारिज कर दिया.

उन्होंने मामले को भारत में हाईप्रोफाइल मामला बताया. वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में प्रेस के सदस्य भी मौजूद हैं जिन्होंने कार्यवाही की स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर जोर दिया. मोदी के वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने भारत में मई में हुए भाजपा के संवाददाता सम्मेलन का हवाला देकर मामले की रिपोर्टिंग पर आंशिक रोक लगाने के लिए आवेदन दिया था. इस आवेदन में कहा गया है कि प्रेस वार्ता में भारतीय उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय थिपसे द्वारा प्रत्यर्पण की सुनवाई के पहले चरण में दिये गये साक्ष्यों पर “अनुचित टिप्पणी” की गई है.

कांग्रेस पार्टी के सदस्य के तौर पर थिपसे पर उनकी विशेषज्ञ कानूनी राय के लिए “राजनीतिक पक्षपात” का आरोप लगाया गया, जो भारत सरकार के मामले को चुनौती देता है. न्यायाधीश गूजी ने कहा, “संवाददाता सम्मेलन की प्रतिलिपि को देखने के बाद, मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि यह राजनीतिक परिदृश्य में दिया गया है… इन कार्यवाहियों से इतर राजनीतिक विचारों और टिप्पणियों का (इस मुकदमे से) कोई मतलब नहीं है.” उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया को ठोस खतरे का कोई सबूत नहीं है जिस वजह से मीडिया पर रोक लगाई जाए.

मोदी की विधि टीम ने प्रत्यर्पण मुकदमे में भारतीय अधिकारियों की नुमाइंदगी कर रही शाही अभियोजन सेवा (सीपीएस) से लिखित आश्वासन मांगा कि थिपसे द्वारा और दिए साक्ष्यों पर कोई सरकारी टिप्पणी नहीं होगी. बैरिस्टर हेलेन मैल्कम आग्रह का निदान करने के लिए राजी हो गये और मोदी के खिलाफ डराने धमकाने के भारत सरकार के मामले को पेश करने लगे. अदालत में एक वीडियो चलाया गया, जिसमें मोदी की स्वामित्व वाली कंपनियों से संबंधित तथाकथित फर्जी निर्देशकों पर दबाव डालने और जान से मारने की धमकियां देने में हीरा कारोबारी की भूमिका को रेखांकित किया गया.

इस बीच मोदी दक्षिण-पश्चिम लंदन की वैंड्सवर्थ जेल के एक कमरे से वीडियो लिंक के जरिए कार्यवाही देखता रहा। मोदी (49) पिछले साल मार्च में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही लंदन की एक जेल में सलाखों के पीछे हैं. वह वीडियो लिंक के जरिए पेश हुआ, जिसमें उसने गहरे रंग का सूट पहना हुआ था और उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी. मुकदमे का दूसरा चरण वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में जारी है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रतिनिधि अदालत में मौजूद थे. ब्रिटेन की शाही अभियोजन सेवा (सीपीएस) जिला न्यायाधीश गूजी के समक्ष उनके मुकदमे की पैरवी कर रही है. भारत सरकार द्वारा अतिरिक्त पुख्ता सबूत जमा कराने के बाद दलीलों को पूरा करने के लिए इस सप्ताह हो रही सुनवाई महत्वपूर्ण है. इसके बाद अदालत अतिरिक्त प्रत्यर्पण आवेदन को देखेगी, जो इस साल के शुरू में भारतीय अधिकारियों ने किए हैं और ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने उसे प्रमाणित किया है. इसमें मोदी के खिलाफ सबूतों को नष्ट करने, गवाहों को धमकाने या जान से मारने की धमकी के आरोप जोड़े गए हैं.

कोरोना वायरस के कारण लागू पाबंदियों के मद्देनजर न्यायाधीश गूजी ने निर्देश दिया कि मोदी को दक्षिण पश्चिम लंदन के वैंड्सवर्थ कारावास के एक कमरे से पेश किया जाए और सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जाए. न्यायाधीश गूजी ने मई में प्रत्यर्पण मुकदमे के पहले चरण की सुनवाई की थी. इस दौरान मोदी के खिलाफ धोखाधड़ी और धन शोधन का प्रथम दृष्टया मामला कायम करने का अनुरोध किया गया था.

गूजी पहले ही कह चुके हैं कि अलग अलग प्रत्यर्पण अनुरोध आपस में जुड़े हुए हैं और सभी दलीलों को सुनने के बाद ही वह अपना फैसला देंगे. अतिरिक्त सुनवाई तीन नवंबर को होनी है, जिसमें न्यायाधीश सबूतों को स्वीकार करने पर व्यवस्था देंगे जो उनके समक्ष रखे जाएंगे और एक दिसंबर को दोनों पक्ष अंतिम अभिवेदन देंगे. इसका मतलब है कि भारतीय अदालतों में मोदी जवाबदेह है या नहीं, इस पर उनका फैसला दिसंबर में अंतिम सुनवाई के बाद ही आयेगा.

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