Book: देश की संस्कृति और विरासत के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी

Updated at : 01 Apr 2026 9:15 PM (IST)
विज्ञापन
Book: देश की संस्कृति और विरासत के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी

पुस्तक की लेखिका व राज्य सभा सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि देश के युवाओं के साथ संवाद करके उन्हें पता चला कि भारत के इतिहास और विरासत के बारे में जागरूकता की कमी है, जो चिंताजनक है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास केवल तारीखों या छिटपुट घटनाओं का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि निरंतर चलने वाला एक जीवंत क्रम है जो हमारी पहचान, मूल्यों और दुनिया को देखने के नजरिए को प्रभावित करता है.

विज्ञापन

Book: संविधान सदन के प्रिंसेस चैंबर में बुधवार को प्रसिद्ध भारतीय लेखिका, समाजसेवी और शिक्षाविद सुधा मूर्ति द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक ‘टाइड्स ऑफ टाइम: भारत हिस्ट्री थ्रू म्यूरल्स इन पार्लियामेंट’ का विमोचन किया गया. पुस्तक का विमोचन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने किया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, पूर्व सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे. उपराष्ट्रपति ने इस पुस्तक को भारत की सभ्यतागत यात्रा के लिए एक उल्लेखनीय सम्‍मान बताते हुए कहा कि इसमें 124 भित्ति चित्रों के वर्णन के माध्यम से इतिहास को जीवंत कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर महर्षि वाल्मीकि और चाणक्य जैसे महान विचारकों के ज्ञान और महावीर और गौतम बुद्ध की आध्यात्मिक शिक्षाओं तक के इतिहास को समेटे हुए है. साथ ही यह पुस्तक भारत की प्रारंभिक लोकतांत्रिक परंपराओं, अशोक और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे शासकों की उपलब्धियों और कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे स्मारकों और भक्ति आंदोलन जैसे आंदोलनों में परिलक्षित सांस्कृतिक समृद्धि को भी उजागर करती है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक भारत के स्वतंत्रता संग्राम को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जिसमें दांडी मार्च जैसे आंदोलन और महात्मा गांधी एवं सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं के नेतृत्व को शामिल किया गया है.

जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रभावी जरिया

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति और उसके विकास की दिशा ऐतिहासिक चेतना से प्रभावित होती है. सदियों से अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद भारत निरंतर दृढ़ता, साहस और प्रगति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया है. यह पुस्तक संसद के भित्तिचित्रों में उकेरे गए समृद्ध इतिहास, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त और प्रभावी जरिया है. ऐतिहासिक संविधान सदन की दीवारों पर लगे चित्र भारत की प्राचीन विरासत, समृद्ध संस्कृति और स्वतंत्रता के ऐतिहासिक संघर्ष को समाहित करते हुए भारत की गौरवगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं. यह कृति संसद की कलात्मक धरोहर, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करती है. इन आख्यानों को एक सम्मोहक और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने वाली यह पुस्तक अतीत और वर्तमान के बीच एक ऐसा सेतु है, जो भावी पीढ़ियों को सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देगी. 

बिरला ने सुधा मूर्ति की सहज अभिव्यक्ति और उनकी गहन अंतर्दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि वह अपनी स्पष्ट और संवेदनशील लेखन शैली से जटिल ऐतिहासिक विषयों को पाठकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए सहज बना देती हैं. यह पुस्तक युवा पीढ़ियों को भारत की जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान से पुनः जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे उनमें गौरव और अपनेपन की भावना बढ़ेगी. देश अपनी विरासत से जुड़े रहते हैं, उससे शक्ति और प्रेरणा प्राप्त करते हैं, वे दृढ़ विश्वास से भविष्य की ओर कदम बढ़ाने में सक्षम होते हैं.

अतीत और मौजूदा लोकतंत्र के बीच एक जीवंत दस्तावेज

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि, यह काफी टेबल बुक भारत के समृद्ध सिविलाइजेशनल अतीत और मौजूदा लोकतंत्र के बीच एक जीवंत दस्तावेज है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुस्तक में दिये गये संदेश को कोट करते हुए कहा कि, पुराने संसद भवन जिसे हम आस्था से संविधान सदन कहते हैं उसके बाहर के गलियारे भारत की सहस्त्राब्दियों यात्रा के विजुअल क्रॉनिकल इतिहास प्रस्तुत करता है. हरिवंश ने कहा कि, इन चित्रों में वैदिक काल से लेकर आजादी के लड़ाई तक के दृश्य है, जो हमारे सिविलाइजेशन, कल्चर और कलेक्टिव कांशसनेस के विकास को अभिव्यक्त करते हैं. हर पैनल का एक ऐतिहासिक क्षण या धरोहर झलक देता है चाहे वह प्राचीन ऋषियों का ज्ञान हो महान शास्त्रों का पराक्रम हो, स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्श हो, इस काफी टेबल बुक की खासियत है. सुधा जी का पैशन, जिज्ञासा और डेडिकेशन ही है, जिसके कारण यह किताब खास बना है साथ ही उनके विरासत के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है.

देश के विरासत और इतिहास से रूबरू होंगे युवा

इस मौके पर सुधा मूर्ति ने पुस्तक के प्रकाशन में सहयोग के लिए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह और लोक सभा सचिवालय के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के साथ संवाद करके उन्हें पता चला कि भारत के इतिहास और विरासत के बारे में जागरूकता की कमी है जो चिंताजनक है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास केवल तारीखों या छिटपुट घटनाओं का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि निरंतर चलने वाला एक जीवंत क्रम है जो हमारी पहचान, मूल्यों और दुनिया को देखने के नजरिए को प्रभावित करता है. हमारे पूर्वजों के बलिदानों, संघर्षों और उपलब्धियों को युवा पीढ़ियों तक रोचक, प्रासंगिक और सार्थक ढंग से संप्रेषित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से युवाओं में आत्मविश्वास, गौरव और अपनेपन की भावना उत्पन्न होगी और उन्हें राष्ट्र के भविष्य में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा सकता है. लोक सभा के महासचिव, उत्पल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया और कहा कि इस प्रकाशन से संसद की कलात्मक तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रलेखन में महत्वपूर्ण संवृद्धि हुई है.

विज्ञापन
Anjani Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola