युवाओं को सीएम की कुर्सी सौंपना चाहती है बीजेपी, छत्तीसगढ़, MP और राजस्थान के लिए पर्यवेक्षकों की घोषणा

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युवाओं को सीएम की कुर्सी सौंपना चाहती है बीजेपी, छत्तीसगढ़, MP और राजस्थान के लिए  पर्यवेक्षकों की घोषणा

छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी अर्जुन मुंडा के साथ सर्बानंद सोनोवाल और दुष्यंत गौतम को सौंपी गई है. छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त की है और यहां सरकार बनाने वाली है.

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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए बीजेपी ने पर्यवेक्षकों की घोषणा कर दी है. ये पर्यवेक्षक इन प्रदेशों में विधायकों की राय से पार्टी प्रमुख को अवगत कराएंगे, जिसके बाद इन प्रदेशों में सीएम के नाम पर मुहर लग जाएगी. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बीजेपी की महामंत्री आशा लकड़ा को हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर और के लक्ष्मण के साथ मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है.

राजस्थान की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडे को सौंपी गई है. वहीं छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी अर्जुन मुंडा के साथ सर्बानंद सोनोवाल और दुष्यंत गौतम को सौंपी गई है. छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त की है और यहां सरकार बनाने वाली है.

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सप्ताह के अंत तक सीएम के नाम पर लगेगी मुहर

पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के बाद यह सूचना सामने आई है कि इस सप्ताह के अंत तक तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला हो जाएगा. अबतक जो सूचना सामने आई है उसके अनुसार बीजेपी तीनों ही राज्यों में नये चेहरे को सीएम की कुर्सी सौंपना चाहती है, इसकी वजह यह है कि बीजेपी हमेशा सेकेंड लाइन का नेतृत्व तैयार करने में विश्वास करती है, ताकि संगठन मजबूत बना रहे. शिवराज सिंह चौहान जैसे अनुभवी नेता को पार्टी नेतृत्व केंद्र में लाना चाह रहा है.

वसुंधरा राजे की बजाय महंत बालकनाथ का पलड़ा भारी

बीजेपी की यह कोशिश है कि वो राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में किसी नये चेहरे को सामने लेकर आए. यही वजह है कि पार्टी राजस्थान में वसुंधरा राजे की बजाय महंत बालकनाथ के दावे पर ज्यादा गौर कर रही है. वसुंधरा राजे को दिल्ली तलब भी किया गया था. वहीं मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का दावा सबसे मजबूत भले ही हो लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी भी रेस में हैं, क्योंकि दोनों युवा चेहरे हैं और सिंधिया तो पीएम मोदी के करीबी भी माने जाते हैं.

छत्तीसगढ़ में ओबीसी या आदिवासी नेता हो सकता है सीएम

छत्तीसगढ़ में बीजेपी डाॅ रमन सिंह की बजाय किसी युवा नेतृत्व पर भरोसा करना चाह रही है.सूत्रों के हवाले से जो सूचना सामने आ रही है कि बीजेपी छत्तीसगढ़ में किसी ओबीसी या आदिवासी नेता को बागडोर सौंपने पर विचार कर रही है. जिनमें रेणुका सिंह, लता उसेंडी और गोमती साय का नाम सामने आ रहा है, जो अनुसूचित जनजाति से हैं. वहीं ओबीसी नेता के रूप अरुण साव और ओपी चौधरी का नाम सामने आ रहा है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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