जानलेवा हुआ जलीकट्टू, 11 साल के बच्चे समेत दो लोगों की मौत, जानिए कैसे खेला जाता है यह खेल

Published by : Pritish Sahay Updated At : 17 Jan 2024 5:48 PM

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Madurai: People participate in a Jallikattu event at Alanganallur, in Madurai, Wednesday, Jan. 17, 2024. (PTI Photo) (PTI01_17_2024_000040B)

तमिलनाडु में जलीकट्टू खेल के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है. कार्यक्रम स्थल पर सांडों के हमले में 11 साल के लड़के समेत एक और शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया था. जिसके बाद दोनों की मौत हो गई.

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तमिलनाडु में शिवगंगा के पास सिरावायल में बुधवार को सांड को वश में करने के खेल जलीकट्टू मौत का खेल बन गया. दरअसल आयोजन के दौरान 11 साल के एक लड़के सहित दो लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि कार्यक्रम स्थल पर सांडों के हमले में एक लड़का और एक शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना के बाद दोनों की मौत हो गई. बता दें. जलीकट्टू तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में खेला जाने वाला पारंपरिक खेल है. इस खेल में बैलों या सांड से इंसानों की लड़ाई होती है. जलीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है.

जलीकट्टू के पहले ही दिन हुए थे 30 से ज्यादा लोग घायल
गौरतलब है कि तमिलनाडु में पोंगल उत्सव की शुरुआत के साथ ही जलीकट्टू का भी आयोजन किया जाता है. मदुरै के अवनियापुरम में सांड को काबू करने वाला लोकप्रिय प्रतियोगिता जल्लीकट्टू काफी प्रसिद्ध है. बता दें, इस खेल के दौरान बिदके सांड को काबू किया जाता है. आयोजन के पहले ही दिन सांड को काबू करने के चक्कर में तीन दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गये थे. इनमें से कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

जलीकट्टू खेल क्या होता है
दरअसल, तमिलनाडु में पोंगल के साथ नव वर्ष की शुरुआत होती है. इस शुभ महीने के पहले दिन सूर्य पोंगल मनाया जाता है. इसी के साथ कई इलाकों में जलीकट्टू खेल का भी आयोजन किया जाता है. जल्लीकट्टू का खेल आमतौर पर 8 राउंड में पूरा होता है. हर राउंड के लिए वादीवासल से 50 से 75 सांडों को छोड़ा जाता है. खेल के नियम के मुताबिक, जो व्यक्ति ज्यादा सांडों को पकड़ता है, उसे अगले राउंड में भेज दिया जाता है. बीते 2000 सालों से ज्यादा समय से तमिलनाडु में जलीकट्टू खेल का आयोजन हो रहा है. यह तमिलनाडु की संस्कृति से जुड़ा है.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था बैन
जलीकट्टू खेल में को उत्तेजित कर छोड़ा दिया है. खेल में उन्हें उकसाने के लिए उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी होता है. ऐसे ही अमानवीय व्यवहार के कारण सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में जलीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोग काफी नाराज थे और फिर अपील करने पर कोर्ट ने जलीकट्टू की अनुमति दे दी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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