Arvind Kejriwal : कपिल सिब्बल ने कहा-अरविंद केजरीवाल अपराधी नहीं आरोपी हैं, उन्हें मिले चुनाव प्रचार के लिए जमानत
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 May 2024 1:36 PM
Kapil sibal
राज्यसभा के सांसद और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि अरविंद केजरीवाल को जमानत दी जानी चाहिए, कानून में इस तरह के प्रावधान हैं कि उन्हें चुनाव प्रचार के लिए राहत मिल सके.
Arvind Kejriwal : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है, इससे पहले राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मीडिया के सामने आकर कहा कि कल ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा और यह कहा कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए. ईडी ने कहा कि चुनाव प्रचार का अधिकार एक कानूनी अधिकार है, यह कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. इसलिए इस आधार पर अरविंद केजरीवाल को जमानत नहीं देनी चाहिए.
चुनाव प्रचार का अधिकार कानूनी अधिकार
कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी ने कोर्ट में जो कहा है वह सही है. चुनाव प्रचार का अधिकार कानूनी अधिकार है, लेकिन कानून में यह प्रावधान भी है कि अगर किसी को सजा दी गई और कोर्ट उस सजा पर स्टे लगा दे, तो उसे प्रचार का अधिकार मिल सकता है, साथ ही वो अपना नामांकन भी कर सकता है. कपिल सिब्बल ने कहा कि उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि हार्दिक पटेल कैसे चुनाव लड़े थे. उनके चुनाव लड़ने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी, उसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गए और कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया. जिसके बाद हार्दिक पटेल चुनाव लड़े और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. मेरा यह कहना है कि जिनके खिलाफ आपके पास सबूत हैं, जिन्हें कोर्ट ने सजा दी है, उन्हें चुनाव लड़ने और प्रचार का अधिकार है,तो फिर जिसपर केवल आरोप है, उन्हें चुनाव प्रचार का अधिकार क्यों ना मिले? कपिल सिब्बल ने कहा कि मैं जानना चाहता हूं कि ईडी किस तरह की राजनीति कर रही है. अरविंद केजरीवाल इसी देश के नागरिक हैं, फिर उनके साथ यह भेदभाव क्यों?
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अरविंद केजरीवाल आदतन अपराधी नहीं
ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अपना फैसला नहीं सुनाया था, लेकिन ईडी से कई सवाल पूछे थे कि आखिर उन्होंने जांच में इतना समय क्यों लगाया? कोर्ट ने यह कहा था कि अरविंद केजरीवाल आदतन अपराधी नहीं है, फिर क्यों नहीं उन्हें चुनाव प्रचार का अधिकार दिया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा था कि चुनाव प्रचार से पहले आखिर क्यों अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई. कोर्ट ने इसे सामान्य केस नहीं बताया और कहा कि क्यों नहीं उन्हें चुनाव प्रचार करने के अंतरिम जमानत दी जाए, क्योंकि चुनाव पांच साल में एक बार होते हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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