राम और “राष्ट्र” पर समझौता नहीं किया जा सकता राहुल गांधी, आचार्य प्रमोद कृष्णम की आई पहली प्रतिक्रिया
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Feb 2024 9:57 AM
कांग्रेस ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयान के आरोप में अपने नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम को पार्टी से निष्कासित करने का काम किया है जिसके बाद कृष्णम ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. जानें उन्होंने क्या कहा
आचार्य प्रमोद कृष्णम…यह वह नाम है जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में इन दिनों तेजी से हो रही है. पिछले दिनों अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ उन्होंने की थी. यही नहीं कांग्रेस के समारोह में नहीं पहुंचने पर वे निशाना साधते नजर आए थे और कहा था कि ये किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ये श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है. इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात करके एक कार्यक्रम का न्योता दिया था. इस बीच खबर है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी ने छह साल के लिए आचार्य प्रमोद कृष्णम को निष्कासित कर दिया है.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस के फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि राम और “राष्ट्र” पर “समझौता” नहीं किया जा सकता. अपने इस पोस्ट को उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को टैग किया है. कृष्णम के इस पोस्ट पर लगातार यूजर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
राम और “राष्ट्र”
पर “समझौता” नहीं किया जा सकता. @RahulGandhi— Acharya Pramod (@AcharyaPramodk) February 11, 2024
जानें कौन हैं आचार्य प्रमोद कृष्णम?
आचार्य प्रमोद कृष्णम की बात करें तो उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ से लड़ा था लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. हालांकि, उन्हें 1.8 लाख वोट प्राप्त हुए थे. 2014 में आचार्य प्रमोद ने यूपी के संभल से लोकसभा चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में भी उन्हें पराजय मिली थी. आचार्य प्रमोद पहले कांग्रेस की उत्तर प्रदेश सलाहकार परिषद का हिस्सा थे, जिसका गठन पार्टी के लिए यूपी प्रभारी के रूप में प्रियंका गांधी वाड्रा की मदद के लिए किया गया था. इंडियन एक्सप्रेस ने एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि आचार्य प्रमोद के नाराज होने की एक वजह समाजवादी पार्टी का संभल और लखनऊ दोनों लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा हो सकती है. इन सीटों पर उनकी नजर थी.
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कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को क्यों दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता?
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कांग्रेस की ओर से आचार्य प्रमोद कृष्णम को निष्कासित करने की खास वजह नहीं बताई गई है. आपको बता दें कि आचार्य प्रमोद 19 फरवरी को यूपी के संभल जिले में कल्किधाम के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित करने के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में लखनऊ पहुंचे थे. इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की, जो इसकी आधारशिला रखेंगे.
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कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से कहा गया कि माननीय कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रमोद कृष्णम को उनके बार-बार पार्टी विरोधी बयानों और अनुशासनहीनता की शिकायतों के मद्देनजर छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने के उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. गौर हो कि कृष्णम राहुल गांधी के भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समय पर और इंडिया गठबंधन पर कई बार निशाना साध चुके हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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