आप तीन तलाक को असंवैधानिक करार दें, हम कड़ा कानून बनायेंगे, सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखा अपना पक्ष
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 May 2017 2:23 PM
नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला को रद्द करे. यदि कोर्ट इन सब चीजों को असंवैधानिक करार दे देती है, तो सरकार इस पर कानून बनाने के लिए तैयार है. तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बेबाकी से अपना […]
नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला को रद्द करे. यदि कोर्ट इन सब चीजों को असंवैधानिक करार दे देती है, तो सरकार इस पर कानून बनाने के लिए तैयार है. तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बेबाकी से अपना पक्ष रखते हुए अटाॅर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मुद्दे पर कोई वैक्यूम नहीं है.
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी, कहा – शादी खत्म करने का ‘सबसे खराब और अवांछनीय रूप’
सुप्रीम कोर्ट ने यह बात तब कही, जब केंदे्र सरकार की ओर से पेश अटाॅर्नी जनरल ने कहा कि दो सदस्यीय पीठ के जिस आदेश को संविधान पीठ के समक्ष पेश किया गया है, उसमें ‘तीन तलाक’ के साथ बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ के मुद्दे भी शामिल हैं.
केंद्र की यह बात कोर्ट की इस टिप्पणी के मद्देनजर अहम है कि वह सिर्फ ‘तीन तलाक’ का मुद्दा निबटायेगा और वह भी तब, जब यह इसलाम के लिए बुनियादी मुद्दा होगा. रोहतगी ने संविधान पीठ से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ के मुद्दे अब भी खुले हैं और कोई और पीठ भविष्य में इसे निबटायेगी. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया, ‘इन्हें भविष्य में निबटाया जायेगा.’
मुसलिम समाज में व्याप्त तीन तलाक को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही है. केंद्र ने सोमवार को अपनी दलीलें पेश करनी शुरू की. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कई बड़े सवाल उठाये थे.
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कोर्ट ने कहा था कि तीन तलाक इसलाम में शादी खत्म करने का सबसे बुरा और अवांछनीय तरीका है. हालांकि, ट्रिपल तलाक को इसलाम के विभिन्न स्कूल ऑफ थाॅट्स में वैध माना गया है.
तीन तलाक के विरोध में मुस्लिम उदारवादी
दूसरी तरफ निजी तौर पर कोर्ट की मदद कर रहे पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि उनकी निजी राय में ट्रिपल तलाक पाप है, लेकिन आॅल इंडिया मुसलिम पर्सनल लाॅ बोर्ड का स्टैंड है कि ट्रिपल तलाक घिनौना है, फिर भी वैध है. वहीं, ऑल इंडिया मुसलिम महिला पर्सनल लाॅ बोर्ड ने भी तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है.
कोर्ट के सवाल
- ट्रिपल तलाक परंपरा है या शरीयत का हिस्सा?
- जो धर्म के मुताबिक घिनौना है, उसे कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है?
- जो ईश्वर की नजर में पाप है, क्या उसे शरीयत में लिया जा सकता है?
- बहुत सारे लोग देश में मौत की सजा को सिन यानी पाप मानते हैं, लेकिन कानूनन ये वैध है.
- अगर भारत में ट्रिपल तलाक विशिष्ट है, तो दूसरे देशों ने कानून बना कर ट्रिपल तलाक को खत्म कर दिया?
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