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नेपाल में 5,700 करोड़ रुपये की लागत से हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट लगायेगा भारत

Updated at : 22 Feb 2017 3:47 PM (IST)
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नेपाल में 5,700 करोड़ रुपये की लागत से हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट लगायेगा भारत

नयी दिल्ली : सरकार ने नेपाल के शंखुवासभा जिले में 5,723.72 करोड़ रुपये की लागत से 900 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना लगाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में नेपाल की इस अरण-तीन परियोजना को मंजूरी […]

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नयी दिल्ली : सरकार ने नेपाल के शंखुवासभा जिले में 5,723.72 करोड़ रुपये की लागत से 900 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना लगाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में नेपाल की इस अरण-तीन परियोजना को मंजूरी देने का फैसला किया गया है. बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक के फैसले की संवाददाताओं को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,723.72 करोड रपये की अनुमानित लागत से नेपाल में अरुण-तीन परियोजना लगाने को मंजूरी दे दी. परियोजना के लिए इस साल सितंबर तक धन की व्यवस्था कर लिये जाने की उम्मीद है. परियोजना को पांच साल में क्रियान्वित किया जायेगा.

परियोजना को तैयार करने का काम सार्वजनिक क्षेत्र की एसजेवीएन लिमिटेड की शत प्रतिशत स्वामित्व वाली अनुषंगी द्वारा किया जायेगा. सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड केंद्र और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम कंपनी है. इसमें केंद्र की 64.46 फीसदी और हिमाचल प्रदेश की 25.51 फीसदी हिस्सेदारी है. एसजेवीएन के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आरएन मिश्र ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना और इसके निवेश को मंजूरी दी है. इसकी प्रतीक्षा की जा रही थी. परियोजना को एसजेवीएन लिमिटेड की शत-प्रतिशत अनुषंगी द्वारा अमल में लाया जायेगा.

एसजेवीएन की अनुषंगी कंपनी एसजेवीएन अरुण-तीन पॉवर डेवलपमेंट कंपनी (एसएपीडीसी) को 25 अप्रैल, 2013 को नेपाल के कंपनी कानून के तहत गठित एवं पंजीकृत कर लिया गया था. नेपाल सरकार के साथ परियोजना के लिए आपसी सहमति ज्ञापन पर 2 मार्च, 2008 को हस्ताक्षर किये गये. परियोजना स्थल नेपाल के शंखुवासभा जिले में स्थित है, जो कि काठमांडू से विराट नगर होते हुए 657 किलोमीटर दूर है. परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 9 जून, 2014 को पुष्टि कर दी थी.

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