जानिये, इस साल जेएनयू किन किन कारणों से रहा विवादों में
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Dec 2016 12:57 PM
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नयी दिल्ली : साल की शुरुआत से लेकर अंत तक जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और विवादों का चोली दामन का साथ रहा. साल की शुरुआत में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रुप से भारत विरोधी नारे लगाए जाने पर छात्रसंघ के नेता समेत कई छात्रों की गिरफ्तारी जहां दुनिया भर में सुर्खियों में आ गयी, […]
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नयी दिल्ली : साल की शुरुआत से लेकर अंत तक जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और विवादों का चोली दामन का साथ रहा. साल की शुरुआत में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रुप से भारत विरोधी नारे लगाए जाने पर छात्रसंघ के नेता समेत कई छात्रों की गिरफ्तारी जहां दुनिया भर में सुर्खियों में आ गयी, वहीं संस्थान के एक छात्र की गुमशुदगी साल के अंत तक एक पहेली बनी रही.
इनके अलावा परिसर में एक शोध छात्रा के साथ कथित बलात्कार की घटना को लेकर भी संस्थान खबरों में बना रहा. इस साल नौ फरवरी को संस्थान के छात्रों ने वर्ष 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को दी गयी फांसी के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था. इस दौरान कुछ अज्ञात छात्रों ने कथित रुप से भारत विरोधी नारेबाजी की.
घटना के चार दिन बाद दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ देशद्रोह और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया. बाद में दो और छात्र उमर खालिद एवं अनिरबान भट्टाचार्य को भी गिरफ्तार कर लिया गया. शुरुआती जांच के आधार पर कन्हैया और सात अन्य छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गयी.
जेएनयू छात्रों पर देशद्रोह का मामला चलाने का सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी विरोध हुआ. केंद्र में सत्तारुढ भाजपा ने तो इसे जायज ठहराया लेकिन विपक्षी दलों ने इसकी निंदा की. साथ ही नोम चोमस्की, ओरहान पामुक, शेल्डन पोलॉक सहित 130 से अधिक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं को दबाने के लिए छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने को ‘‘भारत सरकार की शर्मनाक कार्रवाई” बताया.बाद में कन्हैया को पटियाला हाउस अदालत में सुनवाई के लिए ले जाते समय वकीलों के एक समूह ने उसके साथ मारपीट की.
इस साल 24 फरवरी को एक दूसरे विवाद की शुरुआत हुई जब तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में जेएनयू में लगाए गए एक पोस्टर का हवाला दिया जिसमें कथित रुप से ‘महिषासुर शहादत दिवस’ के बारे में लिखा था. मंत्री ने कहा कि पोस्टर में दुर्गा पूजा को एक नस्ली त्योहार कहा गया और दुर्गा को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी गयीं. संसद में इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ. विपक्षी नेताओं का कहना था कि भाजपा इस पोस्टर पर बहस के जरिए देश के धुव्रीकरण का प्रयास कर रही है.
बलात्कार की एक घटना को लेकर भी विश्वविद्यालय खबरों में छाया रहा. 21 अगस्त को पीएचडी की एक छात्रा ने एक दूसरे पीएचडी छात्र अनमोल रतन के खिलाफ बलात्कार की शिकायत की. उसने शिकायत में कहा कि आरोपी ने 20 अगस्त की रात को अपने छात्रावास के कमरे में उसके पेय में नशीला पदार्थ मिलाया और बेहोश होने पर उसके साथ बलात्कार किया.
पुलिस ने छात्रा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया. आरोपी पहले कुछ दिनों तक फरार रहा और फिर 24 अगस्त को उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.बाद में जेएनयू प्रशासन ने रतन को संस्थान से निलंबित कर दिया.इसके बाद 15 अक्तूबर को कॉलेज का एक छात्र नजीब अहमद लापता हो गया. घटना से एक दिन पहले एम.एससी बॉयो टेक्नोलॉजी, प्रथम वर्ष के छात्र नजीब और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों के बीच परिसर में लडाई हुई थी. मामले को लेकर जेएनयू शिक्षक संघ और संस्थान के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है.
घटना के विरोध में छात्रों ने जेएनयू की प्रशासनिक इमारत को 20 घंटे तक घेरे रखा और कुलपति सहित शीर्ष अधिकारी वहां फंसे रहे. दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है लेकिन घटना के बाद डेढ महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी नजीब का अब भी कोई अता पता नहीं है.
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