...जब मोदी ने कहा, नोटबंदी का निर्णय गलत साबित हुआ तो जिम्मेदारी मेरी

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नयी दिल्ली : इन दिनों पूरे देश में नोटबंदी की चर्चा है, यह सरकार का ऐतिहासिक निर्णय है जिससे पूरा देश प्रभावित है. संसद में कामकाज ठप है और आम लोगों का जीवन भी पूरी तरह प्रभावित है. सरकार के इस निर्णय से देश के का 86 प्रतिशत कैश बेकार हो गया, इस स्थिति ने […]

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नयी दिल्ली : इन दिनों पूरे देश में नोटबंदी की चर्चा है, यह सरकार का ऐतिहासिक निर्णय है जिससे पूरा देश प्रभावित है. संसद में कामकाज ठप है और आम लोगों का जीवन भी पूरी तरह प्रभावित है. सरकार के इस निर्णय से देश के का 86 प्रतिशत कैश बेकार हो गया, इस स्थिति ने देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है.

राइट्‌र्स डॉटकॉम के अनुसार सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले के साथ थे चंद ब्यूरोक्रेट्‌स जिनमें हंसमुख अधिया और पांच अन्य शामिल थे. इनके अतिरिक्त कुछ युवा लोगों की टीम भी इस फैसले में शामिल थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली आवास के दो कमरों में दिन रात रिसर्च वर्क कर रही थी और एक चौंकाने वाले निर्णय के रूप में 500 और 1000 रूप के नोट बंद करने का फैसला सामने आया.

ऐसा कहा जा रहा है कि इन रुपयों को कैश की बजाय सोने और संपत्ति में परिवर्तित ना कर लिया जाये, इसलिए यह गोपनीयता बरती गयी.
नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के इस फैसले को लागू करने के लिए काफी रिस्क लिया है और वे यह भी जानते हैं कि अगर यह निर्णय गलत साबित हुआ, तो दोष सारा उनका ही होगा.
नोटबंदी के बाद से पूरा देश कतार में लगा हुआ है. फैसले के एक महीने बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पायी है. शुरुआती दिनों में तो लोग दिन-रात लाइन में खड़े थे और एक संशय की स्थिति बनी हुई थी. मोदी मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों का कहना है कि आठ नवंबर को कैबिनेट की बैठक में मोदी ने कहा कि मैंने पूरा रिसर्च कर यह निर्णय करने का फैसला किया है और अगर कुछ भी गलत हुआ तो दोषी मैं ही रहूंगा.
नोटबंदी के फैसले के बाद जल्दी ही उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव होने वाले हैं. मोदी के इस फैसले का असर चुनाव पर दिखेगा यह तय है. मोदी की वापसी होगी या नहीं यह तो समय बतायेगा.
नोटबंदी का तमाम रिसर्च हंसमुख अधिया के नेतृत्व में मोदी के आवास में हुआ. अधिया मोदी के विश्वास पात्र हैं वे वर्ष 2003-06 तक मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे.58 वर्षीय अधिया उसी समय से मोदी के भरोसेमंद हैं और उन्होंने ने ही योग से मोदी को परिचित कराया था.
वर्ष 2015 में अधिया रेवेन्यू सेक्रेटरी बने औपचारिक रूप से वे वित्तमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, लेकिन उनका सीधा संपर्क नरेंद्र मोदी से है. मोदी और अधिया जब साथ होते हैं तो गुजराती में बात करते हैं. नोटबंदी की घोषणा के बाद अधिया ने ट्‌वीट किया था कि कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए यह सरकार का सबसे बड़ा और बोल्ड निर्णय है.
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