पवनराजे निंबालकर हत्याकांड: 20 साल, 128 गवाह… फिर भी पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपी बरी
पवनराजे निंबालकर और पद्मसिंह पाटिल
Pawanraje Nimbalkar Murder Case: करीब 20 साल बाद पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है. इस हत्याकांड में सुनवाई जुलाई 2011 से शुरू हुई थी, यानी 15 साल यह केस चला और अंतत: सभी आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए. इस केस में सीबीआई ने अन्ना हजारे सहित 128 गवाहों के बयान दर्ज किए थे. अन्ना हजारे ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें पद्मसिंह पाटिल की ओर से धमकाया गया है.
Pawanraje Nimbalkar Murder Case: महाराष्ट्र की राजनीति के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने एनसीपी नेता पद्मसिंह सहित 8 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. एक आरोपी सरकारी गवाह बन गया था. अदालत ने यह फैसला 20 जून 2026 को सुनाया.
कौन थे पवनराजे निंबालकर, जिनकी हत्या से कांप उठा था महाराष्ट्र
पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र के उस्मानाबाद (धाराशिव) क्षेत्र के प्रभावशाली नेता थे. उनका अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव था. उनका परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि का था, जिनका अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव था. पद्मसिंह पाटिल का क्षेत्र भी उस्मानाबाद ही था. पवनराजे निंबालकर उनके कजिन थे. पवनराजे निंबालकर शुरुआत में पद्मसिंह पाटिल के काफी करीबी माने जाते थे. बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ और दोनों अलग-अलग हो गए. उस्मानाबाद क्षेत्र में इन दोनों परिवारों की प्रतिद्वंद्विता प्रसिद्ध है.
पवनराजे निंबालकर के साथ 3 जून 2006 को क्या हुआ था?
पवनराजे निंबालकर 3 जून 2006 की रात अपने ड्राइवर समद काजी के साथ कार से यात्रा कर रहे थे. नवी मुंबई के पास उनकी कार पर हमला हुआ. हमलावर बाइक और कार पर सवार थे. हमला इतना भयंकर था कि पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर दोनों की ही मौके पर मौत हो गई. इस हत्या को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग यानी सुपारी देकर कराई गई हत्या माना गया था.
सीबीआई ने की हत्या के मामले की जांच
पवनराजे निंबालकर की हत्या के बाद केस की जांच महाराष्ट्र पुलिस ने की, लेकिन यह केस इतना चर्चित था और कई तरह के आरोप लग रहे थे, इसलिए सरकार ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी. सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसे सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या माना और इसे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताया था. इस मामले में सीबीआई ने 2009 में लगभग 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी ने पद्मसिंह पाटिल को हत्या का सूत्रधार बताया था, जिन्होंने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की वजह से पवनराजे निंबालकर की हत्या करवाई. हत्या के लिए 30 लाख रुपए सुपारी देने की बात भी कही गई थी. सीबीआई ने पद्मसिंह पाटिल सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें शूटर और हत्या की योजना को अंजाम देने वाले लोग शामिल थे. एजेंसी ने 181 गवाहों के बयान और 200 से अधिक दस्तावेजों का हवाला दिया था.
पवनराजे निंबालकर केस का महत्व इतना अधिक क्यों?
पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र की राजनीति के उभरते हुए नेता थे, जबकि उनकी हत्या के आरोपी पद्मसिंह पाटिल उस क्षेत्र के जाने-माने राजनीतिज्ञ थे. उनकी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की खूब चर्चा भी होती थी, इसी वजह से इस हत्याकांड का बहुत महत्व था. पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र में मंत्री और सांसद भी रहे थे. 2019 में उन्होंने एनसीपी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. अब वे राजनीतिक रूप से उतने सक्रिय नहीं हैं और उनके बेटे राणा जगजीत सिन्हा पाटिल उस्मानाबाद से विधायक है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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