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अपनी प्राचीन परंपराओं से जरा भी समझौता करने पर महाशक्ति नहीं बन सकता भारत : अमित शाह

Updated at : 22 Oct 2016 10:58 PM (IST)
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अपनी प्राचीन परंपराओं से जरा भी समझौता करने पर महाशक्ति नहीं बन सकता भारत : अमित शाह

कुरुक्षेत्र (हरियाणा) : देश की आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण की जरुरत पर जोर देते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि भारत ने यदि अपनी प्राचीन परंपराओं से जरा भी समझौता किया तो वह महाशक्ति नहीं बन सकता. यहां गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 104वें वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए […]

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कुरुक्षेत्र (हरियाणा) : देश की आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण की जरुरत पर जोर देते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि भारत ने यदि अपनी प्राचीन परंपराओं से जरा भी समझौता किया तो वह महाशक्ति नहीं बन सकता. यहां गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 104वें वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी प्राचीन धरोहर को संरक्षित करके भारत तेजी से एक समृद्ध एवं मजबूत राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है. राजग सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में दुनिया ने देखा है कि भारत किस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा, ‘यह प्रधानमंत्री के अथक प्रयासों का नतीजा है कि पूरी दुनिया ने योग को स्वीकार किया है.’ शाह ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रति आभार व्यक्त किया कि उसने उन्हें ऐसी जगह की यात्रा का मौका दिया जहां भगवान कृष्ण ने ‘भगवद् गीता’ का संदेश दिया था. उन्होंने कहा कि ‘भगवद् गीता’ में दुनिया की सारी समस्याओं का समाधान है. उन्होंने कहा कि गीता की भूमि, जहां स्वामी श्रद्धानंद ने शिक्षा के बीज बोये थे, ने अब गुरुकुल का आकार ले लिया है, जहां युवा पीढी मूल्य आधारित शिक्षा हासिल कर रही है और इसने भौतिकवाद के इस युग में एक सराहनीय काम है.

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन पर शाह ने कहा कि यूं तो उनका जन्म-स्थान गुजरात था, लेकिन इस आध्यात्मिक नेता ने पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में काम किया. उन्होंने कहा कि कई संतों ने हमारी आध्यात्मिक धरोहर संरक्षित करने का काम किया और देश के स्वतंत्रता संघर्ष में अहम भूमिका निभाई. शाह ने कहा कि उन्होंने जनता को ज्ञान देने, विभिन्न सामाजिक बुराइयों को खत्म करने और भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म एवं वेदों को संरक्षित करने का भी काम किया.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस ज्ञान की प्राप्ति से देश में आध्यात्मिक जागरुकता आई, जिससे देश को स्वतंत्रता मिल सकी. शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा आर्य समाज की विचारधारा का समर्थन करती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देश एवं दुनिया का विकास सुनिश्चित करने के लिए स्वामी दयानंद के दिखाए पथ का पालन करें. शाह ने कहा कि स्वामी दयानंद ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी और दुनिया को एक नयी राह दिखाई थी.

लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, राम प्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह और महात्मा गांधी आर्य समाज से जुड़े प्रमुख लोगों में शामिल थे. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि स्वामी दयानंद ने बाल विवाह और सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन कर समाज एवं राष्ट्र को एक नयी दिशा प्रदान की. शाह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती के मद्देनजर इस साल यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को मिले.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन के बाद इस साल को दलित कल्याण वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है. इससे पहले, उन्होंने सुभाष चंद्र बोस एनडीए प्रशिक्षण केंद्र की आधारशिला रखी. पिछले एक हफ्ते में यह शाह का दूसरा हरियाणा दौरा है. इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि आर्य समाज देश की पहली सामाजिक-धार्मिक संस्था है जिसने शिक्षा को बढावा देने के लिए काम किया.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘बच्चों को नैतिक मूल्यों पर आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में अभूतपूर्व काम’ करने के लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र की तारीफ की. खट्टर ने कहा कि राज्य सरकार ने निजी संस्थाओं के साथ मिलकर ग्रामीण इलाकों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण एवं मूल्य आधारित शिक्षा देने के लिए एक योजना तैयार की है ताकि वे पीछे नहीं रहें.

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