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जो इंसान वर्तमान में जीने का शौकीन हो, वह इतिहास की चिंता क्यों करे: पीएम मोदी

Updated at : 02 Sep 2016 9:01 PM (IST)
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जो इंसान वर्तमान में जीने का शौकीन हो, वह इतिहास की चिंता क्यों करे: पीएम मोदी

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएनएन..न्यूज 18 चैनल को दिये इंटरव्यू में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने हरियाणा में लैंड डील के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने काला धन, कश्मीर जैसे अहम मुद्दे पर भी अपनी बात रखी जिस पर विरोधी उन्हें हमेशा घेरते […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएनएन..न्यूज 18 चैनल को दिये इंटरव्यू में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने हरियाणा में लैंड डील के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने काला धन, कश्मीर जैसे अहम मुद्दे पर भी अपनी बात रखी जिस पर विरोधी उन्हें हमेशा घेरते आये हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी मोदी ने अपने विचार रखे. पढ़िये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा इंटरव्यू

अब तक के सफर पर क्या बोले पीएम

भ्रष्टाचार से निराशा का माहौल था. लोगों को लगता था हमने सबकुछ खो दिया. सरकार बनने के बाद हमारी कोशिश रही कि पहले निराशा के भाव को खत्म करके आशा के भाव वापस लाये जाएं. सवा दो साल के सफर से यह साफ है कि लोगों में एक विश्वास जागा है.
जीएसटी पर सवाल

आजाद भारत का यह सबसे बड़ा रिफार्म है. इससे बड़ा बदलाव आयेगा. हमारे देश में बहुत कम लोग टैक्स देते हैं. कुछ लोगों के मन में देशभक्ति की भावना है कुछ के मन में नियम के चलने का संकल्प है तो कुछ को डर है इसलिए देते हैं. ज्यादातर लोग लंबी प्रक्रिया के कारण नहीं देते. इसकी सरलता से लोग टैक्स देने के लिए आगे आयेंगे. होटल में खाने का बिल टैक्स से कम होता था. व्हाट्सएप पर बहुत से लोग इसे शेयर करते हैं इससे मदद मिलेगी की वो सब निकल जायेगा.

आर्थिक व्यवस्था पर सवाल
नकारात्मक माहौल के कारण यहां के व्यपारी बाहर निवेश कर रहे थे. हम जब आये तो अकाल का सामना करना पड़ा. आने के बाद हम एक के बाद एक चैलेंज का सामना करना पड़ा. हमारा इरादा नेक था. नीत साफ थी नीतियां स्पष्ठ थी. इसी का परिणाम आया कि सब सकारात्मक होने लगे. अब दुनिया कहती है कि 7 प्लस ग्रोथ है. यूएन ने सराहा है. सभी मानते हैं कि भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है. इन सारी चीजों का परिणाम है कि देश की आर्थिक व्यवस्था में गति आयी है. इस बार वर्षा भी ठीक हुई है. इससे हमारा उत्साह बढ़ा है कि आने वाला दिन और बेहतर होगा. रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रासफॉर्म और इनफॉर्म की कोशिश कर रहे हैं. यूएन कह रहा है भारत दस नंबर है संभव है कि आगे जल्द ही 2 नंबर पर आ जायेगा.
राजनीतिक लाभ की जगह राष्ट्रनीति चुनी
कई मामलों में हमारी आलोचना हुई. मैंने कई चीजें इसलिए सामने नहीं रखी की देश निराश ना हो. मुझे इसकी आलोचना झेलनी पड़ी. मैंने राजनीतिक कारणों से कभी एक भी फाइल खोलने का निर्देश नहीं दिया. सरकार की तरफ से मैंने कुछ नहीं कहा. कानून- कानून का काम करेगा. मेरी सरकार का पहला फैसला ब्लैक मनी को लेकर एसआईटी गठित की. सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है. इसी का लाभ है कि यहां से कोई बाहर कालाधन भेजने की हिम्मत नहीं कर रहा. अभी भी कोई लोग है जो मुख्यधारा में आना चाहते हैं वो आ सकते हैं लेकिन 30 तारीफ के बाद मैं कोई कठोर कदम उठाऊंगा तो सवाल नहीं होने चाहिए.

जातिवाद से देश बर्बाद हो रहा है

देश की जनता को भरोसा है कि हमारा लक्ष्य विकास है. कुछ लोग है जो परेशान है. जहां तक कुछ घटनाओं का सवाल है मैं मानता हूं कि यह शोभा नहीं देता. लॉ एंड आर्डर राज्य का विषय है. इन चीजों को मोदी के गले मढ़ने की कोशिश की जा रही है. अगर आकड़ों से इसे देखें तो पिछली सरकार की तुलना में यह कम है. मुद्दा ये नहीं है कि पिछली बार क्या हुआ और अब क्या हो रहा है. हजारों साल का पुराना समाज है इसमें विकृतियां आयी है. इनसे समाज को बाहर निकालने की कोशिश करनी होगी. इसकी जड़े पुरानी है. ऐसे सवालों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. भाजपा में दलित आदिवासी सांसदों की संख्या ज्यादा है. दुनिया के 102 देशों में बाबा साहेब की जयंती मनायी गयी. सदन में बाबा साहेब के जीवन पर चर्चा हुई. जातिवाद से देश बर्बाद हो रहा है. समाजिक समस्या को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए.

संभलकर बोले नेता
मैं राजनेताओं को अपनी पार्टी के नेताओं को भी कहता हूं कि अनापशनाप बयानबाजी से बचना चाहिए. हम किसी समाज विशेष का प्रतिनिधित्व करते हो तो भी किसी भी हालत में इस पर ध्यान देना चाहिए. इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए. हम सभी का दायित्व है कि समाज की एकता को बल दें. शांति के लिए सद्भाव जरूरी है. परिवार में एकता जरूरी है.
गरीबी एक राजनीतिक नारा रहा है
पहले चुनाव को ध्यान में रखकर गरीबी पर कई कार्यक्रम चलाये गये हैं. मेरा रास्ता कुछ और है. गरीब को गरीब रखकर राजनीति हो सकती है लेकिन उसे खत्म करने के लिए गरीब को आर्थिक रूप से मजबूत करना होगा. उसे शिक्षित करने पर ध्यान देना होगा. हमने पिछले दिनों जितनी चीजों पर अमल किया है उस पर गौर करें तो हमारा उद्देश्य पता चलेगा. मुद्रा योजना के माध्यम से हम उन्हें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. मुद्रा योजना से लाभ लेकर वो कुछ काम करेंगे. स्टार्ट अप, स्टैंड अप इंडिया के दम पर भी हम परिवार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. हमने छोटे व्यापारी को 24 घंटे व्यापार करने की आजादी दी ताकि वो अपना व्यपार चलाये और लोगों को रोजगार दे. 80 करोड़ युवा देश का भाग्य बदलेंगे. कृषि क्षेत्र में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ेगी. गांव के युवा जो शहर की ओर जा रहे हैं उन पर भी हमारा ध्यान है.
देश के बाहर रह रहे भारतीयों के दिल में भी भारत रहता है

ऐसे बहुत से लोग हैं जो देश के बाहर रहते हैं. वो भारत पर गहरी नजर रखते हैं. देखते हैं कि देश में क्या हो रहा है. उनके मन में भी देश के लिए कुछ ना कुछ करने का इरादा है. ऐसे लोग भारत को सही तरीके से दूसरी जगह रख सकते हैं. मेरी इस कोशिश का लाभ
मिल रहा है.

हर चीज को चुनाव से जोड़ दिया जाता है

मुझे इस बात का दुख है कि हर चीज को लोग राजनीति से जोड़ देते हैं और कुछ लोगों के मन से राजनीति जाती ही नहीं. हमारे देश में कहीं ना कहीं चुनाव चलते रहते हैं. जितना जल्दी हम देश को चुनाव चलाने से जोड़ कर रखते हैं उससे ज्यादा नुकसान होता है. मैं तो देख रहा हूं जितने दिनों दूसरी पार्टियां चुनाव लड़ रही है ज्यादातर मानती है कि क्यों ना एक वक्त में ही विधानसभा और लोकसभा के चुनाव हो जाएं. इस पर व्यापक चर्चा हो. इसे लोकतांत्रित तरीके से ही किया जा सकता है. आने वाले समय में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है. इनमें से यूपी में भी चुनाव होने वाले हैं. भाजपा विकास के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ती है हम उसे ही लेकर आगें बढ़ेंगे. जातिवाद के जहर औऱ संप्रदाय के वोट बैंक ने काफी नुकसान किया.पिछले लोकसभा के चुनाव में ऐसा नहीं था. समाज के हर तबके ने मिलकर एक बहुमत की सरकार बनायी. एक बहुत बड़ा तबका उस ओर मुड़ चुका है. संभव है कि यूपी में ऐसे लोग आगे आयें.

जम्मू कश्मीर पर क्या है रास्ता
जब से देश आजाद हुआ तब से इसके बीज बोये गये हैं. यह समस्या नयी नहीं है . मुझे विश्वास है कि कश्मीर के नौजवान गुमराह नहीं होंगे. जिसे हमें जन्नत के रूप में अनुभव किया है वो जन्नत बनी रहेगी. समस्याओं के सामाधन होंगे. कश्मीर को विकास भी चाहिए विश्वास भी चाहिए. सवा सौ करोड़ देशवासी दोनों के लिए सहमत है. विकास और विश्वास के मार्ग पर हम आगे बढ़ेगे और सफलता पायेंगे.

भ्रष्टाचार पर क्या बोले पीएम

हाईलेवर पर भ्रष्टाचार कम है. बहुत सारे ऐसे फैसले लिये गये है जिसने भ्रष्टाचार की संभावनाओं को ही खत्म कर दिया. गैस सब्सिडी पर लिया गया फैसला, कैरोसीन को लेकर भी हमने चंडीगढ़ में वैसे लोगों को लेने से रोक लगा दी जिनके पास गैस है उन्हें कैरोसिन की जरूत नहीं. यूरिया के लिए किसानोंको लाठी खाना पड़ता था. इन दिनों यूरिया को कमी को लेकर कोई खबर नहीं है. हमने यूरिया की ब्लैकमार्केटिंग बंद करायी. अगर हम टेक्नोलॉजी, नीति आधारित काम करेंगे तो भ्रष्टाचार हर स्तर पर खत्म होगा. मैं अगर उपहास का शिकार होता हूं तो इसकी मुझे चिंता नहीं होती. कई लोग इस सूची में जिनका मजाक उड़ा गया. बाबा साहेब, देवगौड़ा जैसे कई लोग हैं जिनकी कमियां का मजाक उड़ा गया है.
मै जो भी हूं उसमें मीडिया का अहम योगदान है

मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपना काम करूं. मीडिया को मसाला नहीं देता इसलिए उन्हें शिकायत होती है. मीडिया से मेरा पुराना रिश्ता है. आज ऐसे कई लोग है जिनके साथ मैंने चाय पी है गप्पे मारी है. मीडिया अपना काम करता है करता रहे. सरकार के कामकाज का कठोर से कठोर विशलेषण होना चाहिए. आलोचना होनी चाहिए. इसके बिना लोकतंत्र नहीं चल सकता. इसके लिए आपको रिसर्च करना होगा लेकिन इसके लिए उनके पास समय ही नहीं है. तथ्यों के आधार पर आलोचना करे इससे देश का भला होगा.

निजी जीवन पर क्या बोले पीएम
जिस तरह जवान सीमा पर देश की रक्षा के लिए स्वभाव होता है वो अलग होता है. बेटे के साथ खेलता है तो स्वभाव अलग होता है. मेरे अंदर भी एक इंसान है. मैं जैसा हूं वैसा हूं. मैं इसे छुपाने की कोशिश नहीं करता. मैं अपने कर्तव्य को निभाने की कोशिश करता हूं. जहां झुकने की जरूरत होती है झुकता हूं. असली और नकली मोदी नहीं है इंसान है. मोदी जैसा है वैसा ही है. आपको पूर्वाग्रह, राजनीति की चश्मे के आधार पर देखेंगे तो अलग होगा.
वर्किंग स्टाइल पर सवाल
मेरा जो विकास हुआ है उसका सबसे बड़ा कारण है कि मैं बहुत सुनता हूं. समझने की कोशिश करता हूं. इसका फायदा मिलता है. मैं वर्तमान में जीना पसंद करता हूं. मैं एक समय में एक काम पूरे ध्यान से करता हूं. मैं टाइम नहीं देता क्वालिटी टाइम देता हूं. अपने काम को न्याया देने की कोशिश रहती है. विचार छोड़ने और बदलने की हिम्मत चाहिए. कई ऐसी चीजें होंगी जो पहले पसंद थी अब छोड़नी पड़ी. काम से ही मेरा आराम मिलता है. काम ना करने से थकान होती है. संतोष नयी शक्ति देता है. थकान मनोवैज्ञानिक ज्यादा है. विवेकानंद के विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा

वर्तमान में जीने वाला इतिहास की चिंता क्यों करे

हमारे देश का दुर्भाग्य रहा है कि सरकारों ने अपनी छवि बनाने की पूरी कोशिश की. सभी लोगों ने अपनी छवि बनाने की पूरी कोशिश की. काश देश की छवि के लिए काम किया होता. सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरह एक मोदी होगा ऐसी ही मेरी पहचान हो. इससे बड़ा जीवन का आनंद क्या होगा यही खुशी होगी.

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