ईरान युद्ध का भारत की खेती पर पड़ेगा असर?
महिला किसान अपने खेत पर (File Photo PTI)
Iran War : फर्टिलाइजर एंड केमिकल त्रावणकोर (एफएसीटी) ने कहा है कि खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त यूरिया मौजूद है. छह महीने से अधिक युद्ध चला तो दिक्कतें आ सकती हैं. जानें ऐसा क्यों.
Iran War : साउथ इंडिया के राज्यों में फर्टिलाइजर की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एफएसीटी के एक शीर्ष अधिकारी का रिएक्शन ईरान युद्ध को लेकर आया. अधिकारी ने कहा कि देश में खरीफ के मौसम के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है. फिलहाल इसकी कोई कमी नहीं है. बंदरगाह नगरी कोच्चि स्थित इस कंपनी के प्रबंध निदेशक एस शक्तिमणि ने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियों में अगले छह महीने तक सुधार नहीं होता है तो दिक्कतें आ सकती हैं. इससे निपटने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं.
ग्लोबल इकोनॉमी को पहुंच सकता है भारी नुकसान
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान, इजराइल के साथ ही पश्चिम एशिया में अमेरिका के विभिन्न ठिकानों पर भी ड्रोन और मिसाइल दाग रहा है. वहीं इजराइल और अमेरिका की ओर से भी ईरान पर बम और मिसाइलों की बरसात की जा रहा है. ईरान द्वारा लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने से अमेरिका और उसके सहयोगियों-खासकर इजराइल और खाड़ी देशों-के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है. विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले लंबे समय तक जारी रहे तो इससे ग्लोबल इकोनॉमी को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
अपने पास पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है: शक्तिमणि
शक्तिमणि से इन ग्लोबल सरकमस्टांश के भारत में उर्वरक उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में सवाल किया गया. न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभी जो लड़ाई हो रही है, इस दौरान अपने यहां फसल का कोई सीजन (मौसम) नहीं है. सीजन जुलाई बाद से शुरू होगा. हमारा खरीफ का जो सीजन होता है, उसके लिए अपने पास पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि एफएसीटी जैसी कंपनियां पश्चिम एशिया से ही गैस नहीं लेती हैं, आस्ट्रेलिया से भी लेती हैं.
कब होगी भारत को परेशानी, जानें शक्तिमणि ने क्या कहा
शक्तिमणि ने कहा कि उस इलाके में अभी गैस लाइन में कोई परेशानी नहीं है. कुछ जगहों पर जरूर अस्थिरता है लेकिन वह फर्टिलाइजर के लिए कोई समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि डाइअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और डबल सुपर फॉस्फेट (डीएसपी) के लिए केंद्र सरकार ने कंपनियों से भंडार लेकर रखा है जिससे कोई समस्या नहीं आएगी. शक्तिमणि ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है. हमें उम्मीद है कि एक महीने के भीतर शायद चीजें (युद्ध की स्थिति) सुलझ जाएंगी. हम उम्मीद करते हैं कि जब तक हम खरीफ के मौसम में जाएंगे, तब हमें कोई समस्या नहीं होगी. उन्होंने कहा कि लेकिन अगर यह लड़ाई छह महीने के बाद भी जारी रहती है तो फसल के अगले मौसम में यानी रबी के मौसम में परेशानी हो सकती है.
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रबी और खरीफ की फसल के बारे में जानें
भारत में मौसम के हिसाब से सालभर में मुख्य रूप से रबी और खरीफ की फसलें होती हैं. खरीफ फसलें जून-जुलाई से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक जबकि रबी फसलें अक्टूबर-नवंबर से अप्रैल-मई तक होती है. फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए देशभर में बड़ी मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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