पर्रिकर ने कश्मीर पर कहा- छोटे ग्रुप ने अधिकतर लोगों को बना रखा है बंधक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Aug 2016 8:56 AM
वाशिंगटन/नयी दिल्ली: कश्मीर में छोटे ग्रुप ने अधिकतर लोगों को बंधक बना रखा है. यह बात रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कही है. उन्होंने कश्मीर में जारी तनाव के लिए सीमा पार की ताकतों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि घाटी में ‘‘कुछ प्रतिशत लोगों’ ने अधिकतर लोगों को बंधक बना रखा है. उन्होंने कहा […]
वाशिंगटन/नयी दिल्ली: कश्मीर में छोटे ग्रुप ने अधिकतर लोगों को बंधक बना रखा है. यह बात रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कही है. उन्होंने कश्मीर में जारी तनाव के लिए सीमा पार की ताकतों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि घाटी में ‘‘कुछ प्रतिशत लोगों’ ने अधिकतर लोगों को बंधक बना रखा है. उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में हिंसा से निपटने के लिए ‘‘काफी सक्रियता’ से काम कर रही है. पर्रिकर ने सोमवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान पेंटागन के संवाददाताओं से कहा, ‘‘जहां तक कश्मीर की बात है, भारत सरकार सीमा पार से आने वाली हिंसा से निपटने के लिए बेहद सक्रिय रही है.’
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ प्रतिशत लोगों ने अधिकतर लोगों को बंधक बनाकर रखा हुआ है.’ कश्मीर की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कर्फ्यू पहले ही हटा दिया गया है और एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी घाटी जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में कश्मीर में एक ऐसी सरकार है, जिसे लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया है और मुख्यमंत्री घाटी से ही हैं.’
रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक सीआईएसएमओए साझेदारों के बीच द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अभियानों के दौरान सुरक्षित पारस्परिक संप्रेषण के लिए है. यह मित्रवत साझेदार सरकारों को इन उद्देश्यों के लिए मंजूर किए गए उपकरणों के जरिए सुरक्षित संप्रेषण उत्पादों और सूचनाओं की प्राप्ति में मदद देता है.
बीईसीए के तहत भारत तथा अमेरिकी नेशनल जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस एजेंसी (एनजीए) के बीच गैर गोपनीय और नियंत्रित गैर गोपनीय जियोस्पेशियल उत्पादों, डाटा आदि का आदान-प्रदान किया जा सकता है. इसके लिए कीमत अदा करने की जरुरत नहीं होगी। इसके तहत साझेदार सरकारें भौगोलिक, समुद्री और वैमानिक संबंधी डाटा और उत्पादों के लेन-देन पर सहमत होती हैं. इस समझौते के जरिए भारत को विविध जियोस्पेशियल उत्पाद और प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा। इसके अलावा विषय विशेष के विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी संभव हो जाएगा. इसके अतिरिक्त एनजीए के तहत भारत को एनजीए कॉलेज में मनचाहे प्रशिक्षण भी हासिल हो सकेंगे.
जीएसओएमआईए पर हस्ताक्षर पहले ही हो चुके हैं इसका उद्देश्य अमेरिका और साझेदार देश के बीच एक-दूसरे की गोपनीय जानकारी को संरक्षित करना है. एलईएमओए सैन्य संबंधी साजो-सामान, आपूर्ति और भारत तथा अमेरिका के बीच पुनर्भुगतान के आधार पर सेवाओं के लिए नियम बनाता है और उनके संचालन के लिए रुपरेखा भी तैयार करता है.
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