जिगिशा घोष मर्डर केस : दो को मृत्युदंड, एक को उम्रकैद, मां सविता को मिला न्याय

Updated at : 22 Aug 2016 12:12 PM (IST)
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जिगिशा घोष मर्डर केस : दो को मृत्युदंड, एक को उम्रकैद, मां सविता को मिला न्याय

नयी दिल्ली : राजधानी दिल्ली के चर्चित जिगिशा घोषहत्या मामले मेंअाजकोर्ट ने फैसला सुनातेहुए दो दाेषियों को फांसीऔर एक को उम्र कैदकी सजा सुनायी है. इससे पहले साकेत कोर्ट ने बीस अगस्त को सजापर बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आज आईटीप्रोफेशनल जिगिषा घोषहत्याकांड में दो दोषियों […]

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नयी दिल्ली : राजधानी दिल्ली के चर्चित जिगिशा घोषहत्या मामले मेंअाजकोर्ट ने फैसला सुनातेहुए दो दाेषियों को फांसीऔर एक को उम्र कैदकी सजा सुनायी है. इससे पहले साकेत कोर्ट ने बीस अगस्त को सजापर बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आज आईटीप्रोफेशनल जिगिषा घोषहत्याकांड में दो दोषियों रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है. जबकि तीसरे दोषी बलजीत मलिक को उम्रकैद की सजा मिली है. कोर्ट ने रवि पर 20 हजार, अमित परएक लाख और बलजीत पर तीन लाख का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने पिछले महीने ही तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था.जिगिशा की मां सविता घोष से इस फैसले के बाद खुशी जतायी है. उन्होंने कहा है कि मुझे मेरी बेटी की मौत का बहुत दुख है, लेकिन हत्यारों को मृत्युदंड का फैसला आने से मुझे खुशी है. मुझे न्याय मिल गया है. सविता घोष ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि उन दोषियों को मृत्युदंड की सजा अवश्य मिलेगी. जिगिशा की मां के चेहरे पर आज न्याय पाने की मुश्कान दिखी.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत मलिक को आइपीसी की धारा 201 (सबूत नष्ट करने), धारा 364 (हत्या करने के लिए अपहरण), धारा 394 (लूट के दौरान चोट पहुंचाना), धारा 468 (फर्जीवाड़ा), धारा 471 (फर्जी दस्तावेज का वास्तविक इस्तेमाल), धारा 482 (झूठी संपत्ति को व्यवहार में लाना) और धारा 34 के तहत दोषी ठहराया था. रवि कपूर को आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल के अपराध के लिए शस्त्र कानून के तहत भी दोषी ठहराया गया था.

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा, आरोपियों ने उसकी हत्या की और शव को झाड़ियों में फेंक दिया तथा पारिस्थितिजन्य साक्ष्य यह स्पष्ट करता है कि यही लोग थे जिन्होंने अपराध किया था. अदालत ने कहा था कि साक्ष्य से यह काफी स्पष्ट है कि उन्होंने अपराध किया. रिकॉर्ड में यह साबित हो गया कि घटना के दिन जिगिशा अपेक्षित समय पर घर नहीं पहुंची. यह साबित हो गया कि तीनों दोषियों ने जिगिशा का अपहरण किया, उसकी सोने की चेन, दो मोबाइल फोन, दो अंगूठियां और डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड लूटे तथा उसकी हत्या कर दी.

जिगिशा की हत्या के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल कियेगये हथियार की बरामदगी से सौम्या विश्वनाथन की हत्या का मामला भी सुलझ गया था जो एक समाचार चैनल में पत्रकार थी. सौम्या की 30 सितंबर 2008 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी जब वह तड़के अपनी कार में घर लौट रही थी. पुलिस ने दावा किया था कि जिगिशा और सौम्या दोनों की हत्या लूटपाट के लिए की गयी थी.

सौम्या केस में इन्हीं हत्यारों ने खुलासा किया था कि उन्होंने उसकी हत्या इसलिए की, क्योंकि सौम्या की सेंट्रो उनकी कार से आगे निकल गयी थी. हत्यारों ने सौम्या के सिर में गोली मारी थी, जिसकी वजह से कार डिवाइडर पर चढ़ गयी. शुरू में पुलिस ने इसे एक्सीडेंट का केस समझा, लेकिन जब सौम्या के सिर से गोली निकली तो मामला सुलझा.

मालूम हो कि जिगिशा की मार्च 2009 मेंसात साल पहले हत्या कर दी गयी थी. जिगिशा की लाश हरियाणा के सूरजकुंड के पासदो दिन बाद मिली थी. कोर्ट ने इस मामले मेंतीन आरोपियों अमित शुक्ला, बलजीत और रवि कपूर को मर्डर, आपराधिक साजिश रचने, किडनैप, लूट और हथियारों के इस्तेमाल के मामले में दोषी पाया है. आरोपियों ने जिगिशा के साथ ही टीवी जर्नलिस्ट सौम्या घोष का भी मर्डर किए जाने की बात कबूल की है. जिगिशा घोष (28) नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करती थी. वे 2009 को नोएडा में अपने ऑफिस गयीं थी लेकिन लौटकर नहीं आयीं.

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