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विजय विट्ठल माल्या पर संसद में हंगामा, सीबीआइ ने बरती थी ढिलाई

Updated at : 10 Mar 2016 2:01 PM (IST)
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विजय विट्ठल माल्या पर संसद में हंगामा, सीबीआइ ने बरती थी ढिलाई

नयी दिल्ली : देश में बड़ी-बड़ी बातें और बड़े-बड़े दावे होते रहे और 7800 करोड़ रुपये के बैंक लोन डिफॉल्टर,नौ हजारकरोड़ रुपये के कर्जदार, मनी लांड्रिंग के आरोपी विजय माल्या देश छोड़ कर भाग गये. इस मुद्दे पर आज संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस व भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप हुआ. उनकी शलीमैंनहीं आप दोषी, आप […]

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नयी दिल्ली : देश में बड़ी-बड़ी बातें और बड़े-बड़े दावे होते रहे और 7800 करोड़ रुपये के बैंक लोन डिफॉल्टर,नौ हजारकरोड़ रुपये के कर्जदार, मनी लांड्रिंग के आरोपी विजय माल्या देश छोड़ कर भाग गये. इस मुद्दे पर आज संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस व भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप हुआ. उनकी शलीमैंनहीं आप दोषी, आप दोषी वाली थी. सरकार की ओर से जहां वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहाकि माल्या पर कांग्रेस ने ही मेहरबानियां की थी, वहीं कांग्रेसकेगुलामनबी आजाद ने पूछा परियों के साथ चलने वाला विजयमाल्या कैसे भाग गये.आजाद ने कहा कि वह सरकार के शह पर ही भागे हैं. दिलचस्प यह कि दोनों नेताओं के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप उस उच्च सदन (राज्यसभा) में हुआ है, जिसके माल्या स्वयं माननीय सदस्य हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विजय माल्या के मुद्दे पर सदन में बोलने की इच्छाभी जतायी और कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार की फेयर एंड लवली योजना का उन्हें लाभ मिला है. राहुल ने कहा है कि पीएम मोदी इस पर चुप क्यों हैं? इस पर सदन के बाहर अरुण जेटली ने राहुल पर कटाक्ष किया कि माल्या के बाहर जाने और क्वात्रोच्ची के बाहर जाने में अंतर है.


मीडिया की विरोधाभाषी रिपोर्ट


विजय माल्या कहां हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अबतक न तो कोई सरकारी एजेंसीकर पायी है और न ही कोई मीडिया संस्थान. माेटे तौर पर संभावना जतायी जा रही है कि वे लंदन में हैं, लेकिन वहां से रिपोर्ट कर रही भारतीय मीडिया के विभिन्न स्रोतों से अबतक विरोधाभाषी खबरें ही आयी हैं. कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि माल्या लंदन के बाहरी इलाके में स्थित तिवेन गांव में हैं तो कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि वे वहां नहीं हैं और संभव है दुनिया में अपने ऐसे ही आलिशान किसी दूसरे ठिकाने पर हों.दुनियाभर में उनके आलिशानबंगले,गाड़ियां, शाही जीवनशैली के हर साधन उपलब्ध हैं.


विजय विट्ठल माल्या केअद्भुत लीला


विजय विट्ठल माल्या उद्योगपति विट्ठल माल्या के बेटे हैं. उन्हें विरासत में बड़ा नाम, बड़ा उद्योग मिला था, लेकिन वे अपने औद्योगिक नवोन्मेष के बजाय ग्लैमर जगत में हमेशा नया कुछ करने,मॉडलों की तसवीरेंखिंचवानेवसालाना जारी किये जाने वालेकैलेंडर के कारण मीडिया की सुर्खिया में रहे.उनकेकैलेंडरकीकैलेंडरगर्ल बननामाॅडलों के लिए सफलता की गारंटी माना जाता रहा. बड़े बिजनेस कान्फ्रेंस की बजाय माॅडलों व सुंदरियों के साथ उनकी तसवीरें ही अखबारों में छपी अौर चैनलों पर दिखी. विजय माल्या ने देश के सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों से 7800 करोड़ रुपये उधार लिया है. कुछ छोटे सरकारी बैंकों से उन्होंने इतना कर्ज ले रखा है कि इस कारण उनकी सेहत खराब हो गयी है और वे घाटे में चल रहे हैं. आइडीबीआइ बैंक से माल्या ने 900 करोड़ रुपये2009में अपनी एयरलाइन कंपनीकिंगफिशर के लिएलियेथे. बाद में 2012 में माल्या की एयरलाइन बंद हो गयी. हालात इतने बदतर हो गये कि आज जब सस्ते ईंधन के कारण दुनिया भर की विमानन कंपनियों के सुनहरे दिन चल रहे हैं, तब भी माल्या के विमान उड़ान नहीं भर पा रहे हैं और उनके कर्मचारी प्रदर्शन कर आरोप लगा रहे हैं कि माल्या के हाथ उनके खून से रंगे हैं.


ध्यान रहे कि किंगफिशर एयरलाइन को आइडीबीआइ बैंक द्वारा दिये लोन मामले में सीबीआइ ने इस मामले में पिछले दिनों माल्या के कई ठिकानों पर छापा मारा है. जांच एजेंसियोंकाेशक है कि माल्या जिस काम के लिए पैसे लेते थे, उसका उसमें उपयोग नहीं करते और उसे गलत ढंग से देश से बाहर भेज कर इन्वेस्ट करते. इसी कारण दुनिया भर में आज भी उनकी हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति है.यहभी ध्यान देने की बात है किपिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने उन पर मनी लाउंड्रिंग का केस भी दर्ज किया. कहा जा रहा है कि माल्या के लगभग सभी उद्योग देश में ही थे और वे उसी के नाम पर पैसे लेते थे, लेकिन वह उसे देश से बाहर इन्वेस्ट करते थे. इसी कारण यह अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि माल्या की भारत से बाहर दुनिया भर में नौ हजार करोड़ रुपये की संपत्ति है.

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सरकारी एजेंसियों पर भी सवाल


विजय माल्या मामले ने सरकारी एजेंसियों पर भी सवाल उठा दिये हैं. आइडीबीआइ बैंक के बड़े अफसरों ने नियमों को ताक पर रख कर माल्या को कर्ज दिया था. इस कारण उसके अफसर भी सवालों के घेरे में हैं. वहीं, प्राथमिकी दर्ज किये जाने के महीनों बाद भी सीबीआइ एक अनुरोध पत्र नहीं भेज सकी. ये अनुरोध पत्र उन देशों को सीबीअाइ को भेजना था, जहां आइडीबीआइ से लिये गये पैसे भेजने का संदेह था. इस मामले में 28 जुलाई 2015 को ही सीबीआइ की इंस्पेक्टर वर्षा वर्मा ने सिफारिश की थी कि चूंकि यह पैसा देश से बाहर भेजा गया है, अत: विदेशी जांच के लिए अनुरोध पत्र भेजकर ही आगे की जांच की जा सकती है. इसके अगले दिन एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर ली और तलाशी तीन महीने बाद ली. वहीं, अनुरोध पत्र भेजने की प्रक्रिया अभी जारी ही है.

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आसान नहीं है माल्या की धरपकड़


भले ऑफ दी रिकार्ड सरकारी एजेंसियां कहें कि जब माल्या की जरूरत होगी, उन्हें हम ट्रैक कर देश ले आयेंगे. लेकिन, पिछले कई उदाहरण इस दावे को खोखला ही साबित करती हैं. अगर माल्या लंदन में हैं, तो उन्हें भारत लाने के लिए वहां के गृहमंत्रालय से आग्रह करना होगा. अटार्नी जनरल मुकुल रहतोगी ने कल सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ सूत्रों के हवाले से कहा कि माल्या दो मार्च को देश छोड़ गये हैं. रहतोगी ने मीडिया के सामने माल्या से स्वदेश लौटने की अपील की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि सरकार की कोशिश उन्हें देश लाने की होगीऔर पासपोर्ट जब्त नहीं किये जाने की स्थिति में आइपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी जैसी कार्रवाई यानीपासपोर्ट को रद्दकियाजा सकता है,अगर ऐसा होगा तो वह किसी भी देश में रहनेकोलिएवैध नहीं रहजायेंगे औरऐसे में उन्हीं उसी देश में लौटना होगा, जहां से वे गये हैं. लेकिन, एक सवाल क्या ललित मोदी लौट आयेक्या?

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