जयललिता का गेल गैस पाइपलाइन अधिसूचना रद्द करने का आग्रह

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चेन्नई : तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में बिछाई जाने वाले गेल गैस पाइपलाइन पर जारी अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया है. जयललिता ने पत्र में केंद्रीय कानून में बदलाव की मांग करते हुये कहा है कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान उसके सामाजिक प्रभाव […]

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चेन्नई : तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में बिछाई जाने वाले गेल गैस पाइपलाइन पर जारी अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया है. जयललिता ने पत्र में केंद्रीय कानून में बदलाव की मांग करते हुये कहा है कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान उसके सामाजिक प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिये. मोदी को भेजे पत्र में जयललिता ने कहा है की प्रस्तावित पाइपलाइन से इरोड, त्रिपुर, कोयंबटूर, नामाक्कल, धरमापुरी, कृष्णागिरी और सेलम जिलों को अपूर्णीय क्षति होगी. इन जिलों से होकर ही प्रस्तावित कोच्चि-कोट्टानड-मेंगलूरु-बेंगलूरु गैस पाइपलाइन बिछाई जायेगी.

जयललिता ने इस संबंध में पिछले सप्ताह के उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया है जिसमें शीर्ष अदालत ने वर्ष 2013 के राज्य सरकार के उस आदेश के खिलाफ फैसला दिया है जिसमें गेल को परियोजना पर काम रोकने को कहा गया. उन्होंने कहा है कि शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में केंद्र सरकार ‘सक्षम सरकार’ है. न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि एक बार भूमि उपयोग अधिकार के बारे में अधिसूचना जारी हो जाने के बाद राज्य सरकार को परियोजना को लेकर निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है.

जयललिता ने कहा है, ‘संबंधित अधिनियम के तहत मामले में केंद्र सरकार ही सक्षम सरकार है इसलिये भारत सरकार अधिसूचना को रद्द कर सकती है. यह अधिसूचना पेट्रोलियम एवं खनिज पाइपलाइन (उपयोगकर्ता अधिकार अधिग्रहण) अधिनियम 1962, के तहत तमिलनाडु में गेल की पाइपलाइन बिछाने के लिये जारी की गयी है.’ मुख्यमंत्री ने कहा है कि तकनीकी तौर पर पेट्रोलियम एवं खनिज अधिनियम भूमि अधिग्रहण का कानून नहीं है बल्कि इसमें केवल पेट्रोलियम उत्पादों के लिये पाइपलाइन बिछाने के वास्ते भूमि इस्तेमाल का अधिकार दिया जाता है.

जयललिता ने आगे कहा है कि गैस तथा पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिये गैस पाइपलाइन बिछाये जाने का असर काफी व्यापक होगा. इससे किसानों के जीवन और उनकी जीविका पर कई तरह से असर पडेगा. उनके लिये भूमि का इस्तेमाल सीमित रह जायेगा और जोखिम बढ जायेगा. क्षेत्र में पेड, पौधे लगाने पर रोक होगी. यह क्षेत्र मुख्य तौर पर फल उत्पादन वाले पेड लगाने का है और इनके आसपास कोई फसल भी नहीं लगायी जा सकती. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं हो जाता तब तक गेल अधिसूचना पर आगे कदम नहीं बढाये.

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