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वैक्सीन लेने के लिए 68% शहरी भारतीय इच्छुक, 24% अनिश्चित, 8% तैयार नहीं, कहा- प्रभावशीलता की रिपोर्ट का करेंगे इंतजार

By Prabhat khabar Digital
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प्रतीकात्मक फोटो
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सोशल मीडिया

नयी दिल्ली : भारत में वैक्सीन को मंजूरी दिये जाने के बाद देश में ड्राई रन का दौर चला. अब लोगों को वैक्सीन दिये जाने को लेकर तैयारी की जा रही है. वहीं, एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि 68 फीसदी शहरी भारतीयों के वैक्सीन लेने की संभावना है. जबकि, एक चौथाई करीब 24 फीसदी अपने फैसले के बारे में अनिश्चित है. वहीं, केवल आठ फीसदी लोग वैक्सीन लेने को तैयार नहीं हैं.

अच्छी खबर है कि छह फीसदी अल्पसंख्यकों ने ही वैक्सीन पर संदेह जताया है. जबकि, 44 फीसदी ने तुरंत वैक्सीन लेने की बात कही है. वहीं, 50 फीसदी ने कहा है कि वे वैक्सीन लेने से पहले उसकी प्रभावशीलता के बारे में रिपोर्ट देखने का इंतजार करेंगे.

विश्लेषणों से पता चलता है कि आयु, लिंग, धर्म और क्षेत्र भी वैक्सीनेशन के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित नहीं करते हैं. महामारी के कारण चिंता और खराब मानसिक स्वास्थ्य की रिपोर्ट करनेवाले लोगों के तुरंत वैक्सीन लेने की संभावना होती है.

भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करनेवाले ज्यादातर लोग वैक्सीन लेने की संभावना रखते हैं. वहीं, कांग्रेस का समर्थन करनेवाले भी बहुत पीछे नहीं हैं. जो लोग किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करते हैं, वे तुरंत वैक्सीन लेने के बारे में सबसे अधिक उलझन में हैं.

कोरोना वायरस को लेकर पुरानी पीढ़िया महामारी की चपेट में हैं. लेकिन, कम उम्र के लोग वैक्सीनेशन के लिए अधिक उत्साही हैं. भारत में वैक्सीन लेने की प्राथमिकता रही है. जबकि, सहस्त्राब्दी से पहले वैक्सीन की प्रभावशीलता देखने के लिए लोग इंतजार करना चाहते थे.

आय का स्तर भी वैक्सीनेशन के प्रति दृष्टिकोण निर्धारित नहीं करता है. इसके विपरित चिकित्सा बीमा के रूप में स्वास्थ्य कवर खरीदने का निर्णय आय के स्तर से प्रेरित है. पांच लोगों में मात्र एक व्यक्ति ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य या कोविड-19 विशिष्ट बीमा योजना खरीदी. ज्यादातर अपेक्षाकृत गरीब का कहना है कि उसके पास बीमा नहीं है और इस तरह का बीमा कवर खरीदने का इरादा भी नहीं है.

वैक्सीन नहीं लेनेवाले या निर्णय नहीं ले पाने लोगों का कहना है कि वे वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर संकोच कर रहे हैं. वे पहले इसकी समीक्षा करना चाहते हैं. वैक्सीन लेनेवाले लोगों के बीच सुरक्षा चिंता सर्वोपरि है. करीब 41 फीसदी ने कहा है कि शॉट लेने से कुछ महीने पहले इंतजार करेंगे.

करीब 33 फीसदी लोगों ने कहा है कि वैक्सीन उपलब्ध होते ही वे शॉट लेंगे. जबकि, 13 फीसदी सरकारी या 11 फीसदी नियोक्ता-शिक्षण संस्थानों द्वारा वैक्सीनेशन अनिवार्य किये जाने पर लेने को तैयार होंगे.

वैक्सीन को लेकर एक सामान्य हिचकिचाहट है. अच्छी खबर है कि आधे भारतीयों से अधिक 55 फीसदी ने कहा है कि भारतीय मूल के वैक्सीन को अमेरिका, ब्रिटेन और रूस से अधिक भरोसा करते हैं. वहीं, 11 फीसदी अमेरिका, सात फीसदी ब्रिटेन और छह फीसदी रूस की वैक्सीन पर भरोसा जताया है.

करीब 36 फीसदी लोगों का मानना है कि वैक्सीन केवल गरीब, बुजुर्ग या जो गंभीर रूप से बीमार हैं, उन्हें मुफ्त देना चाहिए. जबकि, 14 फीसदी लोगों का मानना है कि वैक्सीनेशन के इच्छुक लोगों को इसका भुगतान करना चाहिए.

प्राथमिकता के क्रम में गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों, वरिष्ठ लोगों को वैक्सीनेशन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके अलावा फ्रंटलाइन वर्कर्स और सर्विस इंडस्ट्री के लोगों को वैक्सीन प्राथमिकता की सूची में उच्च दर्जा देने की बात 79 फीसदी लोगों ने की है.

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