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भारत में 6.5 फीसदी बर्बाद हो रही है कोरोना वैक्सीन की खुराक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत पांच राज्य नुकसान करने में सबसे आगे

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
भारत में कोरोना का टीका हो रहा बर्बाद.
भारत में कोरोना का टीका हो रहा बर्बाद.
प्रतीकात्मक फोटो.
  • देश में अब तक दी गई कोरोना टीके की 3.51 करोड़ खुराक

  • केंद्र सरकार ने राज्यों को दी किफायती इस्तेमाल की चेतावनी

  • भारत में फिर बढ़ने लगे हैं कोरोना वायरस के नए मामले

Corona vaccine : कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ भारत में जहां दुनिया के सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, वहीं यहां पर कोरोना टीका की खुराक की सबसे अधिक बर्बादी भी हो रही है. खबर है है कि भारत में कोरोना टीके की औसतन 6.5 फीसदी खुराक बर्बाद हो रही है.

चिंता की बात तो यह है कि देश के सबसे शिक्षित प्रदेशों में शुमार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में टीके की सबसे अधिक खुराक बर्बाद हो रही है. तेलंगाना में यदि 17.6 फीसदी खुराक बर्बाद हो रही है, तो आंध्र प्रदेश में कोरोना के टीके की करीब 11.6 फीसदी बर्बादी हो रही है. कोरोना टीके की बर्बादी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को इसका किफायती तरीके से इस्तेमाल की चेतावनी भी दी है.

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के अनुसार, अब तक देश में टीके की 3.51 करोड़ खुराक दी गई है, जिनमें से 1.38 करोड़ खुराक 45 से 60 साल की उम्र के बीच गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को दी गई है. उन्होंने बताया कि 15 मार्च को दुनिया में कोरोना की 83.4 लाख खुराक दी गई, जिनमें से 36 फीसदी खुराक अकेले भारत में दी गई.

भूषण ने बताया कि पांच राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर) में टीके की खुराक की बर्बादी राष्ट्रीय औसत 6.5 फीसदी से अधिक है. उन्होंने कहा कि राज्यों को संदेश दिया गया है कि कोरोना के टीके अनमोल हैं. ये लोगों की सेहत की बेहतरी के लिए है और इसलिए किफायती तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. टीके की बर्बादी को बड़े पैमाने पर कम करने की जरूरत है. टीके की बर्बादी कम होने का अभिप्राय है कि आप और अधिक लोगों का टीकाकरण कर सकते हैं और इससे संक्रमण की कड़ी को तोड़ने की अधिक संभावना होगी, जो बढ़ रही है.

मंत्रालय के अुनसार, एक से 15 मार्च के बीच 16 राज्यों के 70 जिलों में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 150 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 17 राज्यों के 55 जिलों में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 100 से 150 फीसदी के बीच बढ़ोतरी देखने को मिली. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इनमें से अधिकतर जिले पश्चिम एवं उत्तर भारत के हैं.

भूषण ने राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों की जानकारी देते हुए कहा कि अगर हम महाराष्ट्र को देखें, तो देशभर के कुल इलाजरत मरीजों में से 60 फीसदी मरीज अकेले यहां हैं, जबकि नई मौतों में 45 फीसदी मौतें अकेले महाराष्ट्र में दर्ज की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि एक मार्च को औसतन 7,741 नए मामले दर्ज किए जा रहे थे, जबकि 15 मार्च से नए मामलों की औसतन संख्या 13,527 हो गई. एक मार्च को जहां संक्रमण दर (कुल जांच किए गए नमूनों के अनुपात में संक्रमित) 11 फीसदी थी, जो 15 मार्च से बढ़कर 16 फीसदी हो गई.

स्वास्थ्य सचिव ने रेखांकित किया कि संक्रमण दर में वृद्धि चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि जिस रफ्तार से संक्रमण की दर बढ़ रही है, उस गति से जांच की संख्या नहीं बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि हमारा राज्यों को सलाह है खासतौर पर महाराष्ट्र को कि वे जांच की संख्या बढ़ाएं, विशेषतौर पर आरटी-पीसीआर पद्धति से जांच की.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विशेष तौर पर 12 राज्यों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए मास्क पहने, सामाजिक दूरी, हाथ साफ करने और भीड़भाड़ पर नियंत्रण के नियम को सख्ती से लागू कराने की सलाह दी गई है. केंद्र ने राज्यों को अधिक मौतों वालों जिलों में चिकित्सा प्रबंधन सुनिश्चित करने और जांच, पहचान और इलाज की रणनीत को लागू करने की सलाह दी है. मंत्रालय ने कहा कि ऐसे जिलों में जांच की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और कम से कम 70 फीसदी जांच आरटी-पीसीआर से होनी चाहिए.

Posted by : Vishwat Sen

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