जमानत रद्द करने की याचिका पर HC ने मांगा भारती और पुलिस से जवाब

Published at :01 Dec 2015 3:11 PM (IST)
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जमानत रद्द करने की याचिका पर HC ने मांगा भारती और पुलिस से जवाब

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज आम आदमी पार्टी के विवादास्पद विधायक सोमनाथ भारती और पुलिस से भारती की पत्नी की याचिका पर जवाब देने के लिए कहा है. भारती की पत्नी लिपिका ने इस याचिका के जरिए घरेलू हिंसा मामले में उनकी (भारती की) जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है. न्यायाधीश […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज आम आदमी पार्टी के विवादास्पद विधायक सोमनाथ भारती और पुलिस से भारती की पत्नी की याचिका पर जवाब देने के लिए कहा है. भारती की पत्नी लिपिका ने इस याचिका के जरिए घरेलू हिंसा मामले में उनकी (भारती की) जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है. न्यायाधीश पी एस तेजी ने भारती और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करके उन्हें 16 फरवरी तक अपने जवाब दायर करने के निर्देश दिये हैं. भारती की पत्नी ने उन्हें सात अक्तूबर को दी गयी जमानत को रद्द करने का अनुरोध किया है. इसके लिए उन्होंने कई आधार बताए हैं. इनमें एक वजह यह भी बतायी गयी है कि निचली अदालत ने दिल्ली के इस पूर्व मंत्री को राहत देते हुए अपना दिमाग नहीं लगाया.

लिपिका ने कहा कि जमानत का आदेश एक फैसले की ही तरह था और निचली अदालत ने ऐसा करने के लिए केस डायरी को आधार बनाया. इस स्तर पर ऐसा कथित तौर पर नहीं किया जाना चाहिए था. लिपिका ने भारती के खिलाफ घरेलू हिंसा और हत्या की कोशिश का मामला दर्ज कराया था. उच्चतम न्यायालय की ओर से आत्मसमर्पण के आदेश जारी किये जाने के बाद ‘आप’ के नेता को 29 सितंबर को तडके गिरफ्तार कर लिया गया था. निचली अदालत ने भारती को यह कहते हुए राहत दे दी थी कि जांच के लिए उनकी और जरुरत नहीं है. साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि चूंकि वह दिल्ली विधानसभा के सदस्य हैं, इसलिए पुलिस की इन शंकाओं से सहमत होने का कोई आधार नहीं है कि वह भागकर विदेश जा सकते हैं.

हालांकि निचली अदालत ने भारती पर कई शर्तें भी लगा दीं. इन शर्तों में ये बातें शामिल हैं कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली नहीं छोडेंगे, साक्ष्यों के साथ छेडछाड नहीं करेंगे और जब भी जरुरत होगी जांच में शामिल होंगे. अदालत ने भारती को यह भी निर्देश दिया था कि वह डीसीपी (दक्षिण पश्चिम) के कार्यालय में सप्ताह में एक बार अपनी मौजूदगी तब तक दर्ज कराते रहेंगे, जब तक कि इस मामले में आरोपपत्र नहीं दायर हो जाता. 22 सितंबर को उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत के लिए दायर की गयी भारती की याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि ‘दस्तावेजी सबूत’ उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को मजबूत करते हैं.

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