गृह मंत्रालय ने अनुच्छेद 370 संबंधी अदालती आदेश पर रिपोर्ट मांगी
Updated at : 12 Oct 2015 9:21 PM (IST)
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नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के अनुच्छेद 370 के संदर्भ में दिए गए आदेश पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने कहा है कि राज्य को विशेष दर्जा देने वाला यह अनुच्छेद संशोधन, निरसन अथवा रद्द किए जाने से परे है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने […]
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नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के अनुच्छेद 370 के संदर्भ में दिए गए आदेश पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने कहा है कि राज्य को विशेष दर्जा देने वाला यह अनुच्छेद संशोधन, निरसन अथवा रद्द किए जाने से परे है.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति मुहैया कराने तथा उन आधारों को स्पष्ट करने को कहा है जिन पर यह आदेश आया है. माना जा रहा है कि राज्य का कानून विभाग उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति केंद्र सरकार को सौंपेगा.
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने कल कहा कि राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 ने संविधान में स्थायी जगह हासिल कर ली है और यह संशोधन, निरसन या रद्द किए जाने से परे है. अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर में लागू मौजूदा कानूनों को ‘संरक्षण’ प्रदान करता है.
न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी और न्यायमूर्ति जनक राज कोटवाल की खंडपीठ ने अपने 60 पृष्ठ के फैसले में कहा, ‘‘‘अस्थायी प्रावधान’ के शीर्षक के तौर पर और पैरा 21 में अस्थायी, परिर्वनकारी एवं विशेष उपबंधों’ के शीर्षक से शामिल किया गया अनुच्छेद 370 संविधान में स्थायी जगह ले चुका है.
‘ पीठ ने कहा, कि इस अनुच्छेद को संशोधित नहीं किया जा सकता , हटाया नहीं जा सकता या रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि देश की संविधान सभा ने, उसे भंग किए जाने से पहले इस अनुच्छेद को संशोधित करने या हटाये जाने की अनुशंसा नहीं की थी. भाजपा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग करती रही है.
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