व्यापमं घोटाला : अगले ही दिन मेडिकल छात्रा नम्रता डामोर की फाइल एमपी पुलिस ने की बंद
Updated at : 08 Jul 2015 4:09 PM (IST)
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भोपाल : मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले मामले में छात्रा नम्रता डामोर की मौत का मामला एक बार फिर गर्म हो गया. मालूम हो कि इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की छात्रा रही नम्रता डामोर का शव उज्जैन में रहस्यमय परिस्थितियों में रेलवे पटरी पर सात जनवरी 2012 को मिला था. हाल में व्यापमं […]
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भोपाल : मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले मामले में छात्रा नम्रता डामोर की मौत का मामला एक बार फिर गर्म हो गया. मालूम हो कि इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की छात्रा रही नम्रता डामोर का शव उज्जैन में रहस्यमय परिस्थितियों में रेलवे पटरी पर सात जनवरी 2012 को मिला था. हाल में व्यापमं घोटाले की रिपोर्टिंग करने झाबुआ पहुंचे पत्रकार अक्षय सिंह की मौत नम्रता डामोर के पिता का इंटरव्यू करने के दौरान ही हुआ था.
अक्षय सिंह की मौत ने नम्रता डामोर के केस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. नम्रता डामोर असमय मौत की शिकार होने वाली व्यापमं घोटाले से जुडी शुरुआती शख्स में है. नम्रता पर गलत ढंग से मेडिकल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से नामांकन पाने का आरोप था. कल उज्जैन के एसपी मनोहर सिंह वर्मा ने इस मामले की पुन: जांच करने का निर्देश अपने कनिष्ठ अधिकारी तराना के अनुभागीय पुलिस अधिकारी को दिया था.
एक दिन बाद फिर आज एमपी पुलिस कह रही है कि नम्रता डामोर की मौत आत्महत्या थी. पुलिस ऐसा कह कर अपना पल्ला झाडने की कोशिश कर रही है. पुलिस ने कहा है कि उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ भी ऐसा नहीं पाया गया, जिससे शक हो, इसलिए फाइल बंद कर दी जा रही है. हालांकि उस समय हुए पोस्टमार्टम में यह आशंका भी जतायी गयी थी कि नम्रता के साथ पहले बलात्कार की कोशिश हुई थी और बाद में उसकी गला दबा कर हत्या कर दी गयी.
क्या है नम्रता का केस
झाबुआ की रहने वाली नम्रता डामोर पर आरोप था कि उन्हें व्यापमं घोटाले के जरिये मेडिकल कॉलेज में नामांकन मिला था. सात जनवरी 2012 को उज्जैन के निकट रेल पटरी पर उनका शव मिला. 2014 में पुलिस ने आत्महत्या बता कर उनकी फाइल बंद कर देने की रिपोर्ट जमा की थी.
हालांकि ऑटोप्सी रिपोर्ट में गला दबाने की बात का खुलासा हुआ था. इस रिपोर्ट में यह आशंका जतायी गयी थी कि हत्या के पहले उनके साथ बलात्कार की कोशिश हुई थी. नौ जनवरी, 2012 को तीन डाक्टरों के बोर्ड ने यह रिपोर्ट दी थी. वह इंदौर के महत्मा गांधी कॉलेज की छात्रा थीं.
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