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भूमि अध्यादेश के खिलाफ दायर पीआइएल को सुनवायी के लिए शीर्ष अदालत ने किया स्वीकार

Updated at : 10 Apr 2015 11:36 AM (IST)
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भूमि अध्यादेश के खिलाफ दायर पीआइएल को सुनवायी के लिए शीर्ष अदालत ने किया स्वीकार

नयी दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को फिर से सरकार द्वारा जारी करने के खिलाफ याचिका को सुनवाई के लिए आज स्वीकार कर लिया. उल्लेखनीय है नरेंद्र मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की समाप्ति की तारीख पांच अप्रैल के पूर्व इसे फिर से जारी किया था, जिस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी […]

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नयी दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को फिर से सरकार द्वारा जारी करने के खिलाफ याचिका को सुनवाई के लिए आज स्वीकार कर लिया. उल्लेखनीय है नरेंद्र मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की समाप्ति की तारीख पांच अप्रैल के पूर्व इसे फिर से जारी किया था, जिस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी हस्ताक्षर कर दिया था.
नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसा राज्यसभा के बजट सत्र का सत्रवसान किया, क्योंकि इस अध्यादेश का विधेयक स्वरूप उपरी सदन में अटका था, जबकि लोकसभा में यह पारित हो गया था. संवैधानिक बाध्यताओं के अनुसार, सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अगर अध्यादेश कानून के रूप में पारित नहीं हो पाता है, तो वह स्वत: छह सप्ताह बाद रद्द हो जाता है और सदन की कार्यवाही जारी होने की स्थिति में कोई अध्यादेश लाया नहीं जा सकता.
ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार ने राज्यसभा जहां यह विधेयक अटका हुआ है, उसका सत्रवसान कर अध्यादेश को फिर से जारी किया. सरकार के इस कदम की विपक्ष द्वारा तीखी आलोचना भी की गयी. भूमि अध्यादेश पर फिलहाल देश में कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टी आंदोलित हैं.
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