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कोयला खदान आवंटन मामला : समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मनमोहन सिंह

Updated at : 25 Mar 2015 3:19 PM (IST)
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कोयला खदान आवंटन मामला : समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मनमोहन सिंह

नयी दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उद्योगपति कुमार मंगलम बिडला ने कोयला खदान आवंटन मामले में आरोपी के रुप में तलब करने के विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में आज याचिका दायर की। विशेष अदालत ने 2005 में ओडीशा में तालाबीरा-दो कोयला खदान का आबंटन आदित्य बिडला समूह की कंपनी हिण्डालको […]

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नयी दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उद्योगपति कुमार मंगलम बिडला ने कोयला खदान आवंटन मामले में आरोपी के रुप में तलब करने के विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में आज याचिका दायर की। विशेष अदालत ने 2005 में ओडीशा में तालाबीरा-दो कोयला खदान का आबंटन आदित्य बिडला समूह की कंपनी हिण्डालको को करने से संबंधित मामले में उन्हें तलब किया है.

हिण्डालको के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिडला और पूर्व कोयला सचिव पी सी परख ने भी विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देते हुये याचिका दायर की हैं. इन दोनों को भी इस मामले में आरोपी के रुप में तलब किया गया है.

मनमोहन सिंह ने सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश भरत पराशर द्वारा आठ अप्रैल को आरोपी के रुप में पेशी के लिये उनके नाम जारी समन निरस्त करने का अनुरोध किया है. पूर्व प्रधानमंत्री का कहना है कि विशेष न्यायाधीश ने बगैर सोच विचार के ही 11 मार्च को यह आदेश दिया है.

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के नेतृत्व में वकीलों के दल ने मनमोहन सिंह की याचिका को अंतिम रुप दिया है जिसका एक दो दिन में ही शीघ्र सुनवाई के लिये उल्लेख किये जाने की संभावना है.

शीर्ष अदालत में याचिका दायर करने से जुडे वकीलों में से एक वकील ने कहा कि याचिका में समन जारी करने के आदेश को कई आधार पर चुनौती दी गयी है. याचिका में यह भी कहा गया है कि रिकार्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह पता चलता हो कि सिंह ने ऐसा कोई काम किया है जो अपराध हो.

याचिका के अनुसार पूर्व प्रधान मंत्री ने तालाबीरा-दो कोयला खदान हिण्डालको को आवंटित करने के लिये ओडिशा सरकार के प्रतिवेदन पर बतौर सक्षम प्राधिकारी फैसला किया था.इस वकील का कहना है कि फैसला लेने में हो सकता है कि गलती हुयी हो लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह पता चलता हो कि पद का दुरुपयोग किया गया है और वैसे भी सरकार में फैसला लेना तो कोई अपराध नहीं है.

विशेष अदालत के न्यायाधीश ने 11 मार्च को अपने आदेश में कहा था, ‘‘मैं छह आरोपियों मेसर्स हिण्डालको, शुभेन्दु अमिताभ, डी भट्टाचार्य, कुमार मंगलम बिडला, पी सी पारख और डा मनमोहन सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और धारा 409 तथा भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13(1)(सी)और 13 1(डी)(3) के तहत अपराधों का संज्ञान ले रहा हूं.’’ भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13 (1)(सी) लोक सेवक को सौंपी गयी संपत्ति का बेईमानी से अमानत में खयानत करना या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देने से संबंधित है.

इसी तरह, धारा 13 (1)(डी)(3)लोक सेवक द्वारा बगैर किसी जनहित के ही किसी व्यक्ति के लिये आर्थिक लाभ प्राप्त करने से संबधित है.हिण्डालको और उसके अधिकारियों शुभेन्द्र अमिताभ और डी भट्टाचार्य ने भी विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देते हुयी याचिकायें दायर की हैं.

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