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सैन्यकर्मियों के लिए कल्याणकारी कदमों में तेजी लायी जाएगी : पर्रिकर

Updated at : 30 Nov 2014 7:18 PM (IST)
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सैन्यकर्मियों के लिए कल्याणकारी कदमों में तेजी लायी जाएगी : पर्रिकर

पणजी : पिछले तीन वर्षो में सशस्त्र बलों में करीब 450 से ज्यादा आत्महत्या के मामलों से चिंतित रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि इसके पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है और जवानों के लिए कल्याणकारी उपाय करने में तेजी लायी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘‘यह मानव प्रबंधन का मुद्दा है, […]

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पणजी : पिछले तीन वर्षो में सशस्त्र बलों में करीब 450 से ज्यादा आत्महत्या के मामलों से चिंतित रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि इसके पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है और जवानों के लिए कल्याणकारी उपाय करने में तेजी लायी जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘‘यह मानव प्रबंधन का मुद्दा है, जिसे विभिन्न तरीके से सुलझाने की आवश्यकता है, जिसमें काउंसिलिंग, त्वरित समाधान प्रक्रिया और मामलों की सुनवाई के लिए ज्यादा न्यायाधिकरण बनाना शामिल है.’’ उन्होंने कहा कि रक्षा कर्मियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा, ताकि सुनिश्चित हो सके कि आत्महत्या पूरी तरह रुक जाए.

रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वे आत्महत्या के कारणों का पता लगाएं.आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सशस्त्र बलों में वर्ष 2011 से आत्महत्या के 449 मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि अलग-थलग और परिवार से दूर रहना आत्महत्या के कारणों में शामिल है. उन्होंने कहा कि सभी कल्याणकारी योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी.
इस वर्ष सशस्त्र बलों में आत्महत्या के कुल 99 मामले सामने आए. इसके अलावा तीन मामलों में जवानों ने अपने सहकर्मियों की हत्या कर दी. सेना में इस वर्ष सबसे ज्यादा आत्महत्या के 76 मामले सामने आए जिसके बाद वायुसेना में यह संख्या 23 रही. सेना में जवानों द्वारा अपने सहकर्मियों को मारने की दो घटनाएं हुईं, जबकि वायुसेना में ऐसी एक घटना हुई.
तीनों सेनाओं में सबसे बड़ी थल सेना में 2011 से आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा हुए. हालांकि इस संख्या में कमी आयी है. सेना में 2011 में आत्महत्या के 105 मामले दर्ज किए गए, वहीं 2012 में यह संख्या कम होकर 95 और 2013 में यह 86 रह गयी. पर्रिकर ने पहले संसद को बताया था कि इस तरह के कारणों में ‘‘पेशेवराना परेशानियों (लगातार लंबे समय तक तैनाती), पारिवारिक समस्याएं, घरेलू परेशानियां, विवाह के झगड़े, निजी समस्याएं, मानसिक बनावट, वित्तीय परेशानियां और तनाव नहीं सह सकना’’ शामिल है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उनमें काम की स्थितियां, अतिरिक्त परिवार आवास, सरल छुट्टी नीति, मानसिक काउंसिलिंग की व्यवस्था और योग एवं ध्यान कराना शामिल है. उन्होंने कहा कि विवाहित सैन्यकर्मियों के परिवार के लिए आवास जैसे मुद्दों का तुरंत समाधान किया जाना चाहिए.
पार्रिकर ने कहा, ‘‘गोवा के नौसैनिक इलाके में 700 से 800 क्वार्टर हैं जो विवाहित दंपतियों के लिए बनाए जा रहे हैं. वहां काम धीमी गति से चल रहा है. मैं देश में ऐसी परियोजनाओं की समीक्षा करुंगा.’’ उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत गोवा पत्तन लिमिटेड आठ सुरंगभेदी पोतों का निर्माण करेगा, जिसमें अधिकतम स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सिद्धांत रूप में निर्णय किया गया है कि आठ सुरंग भेदी पोतों के निर्माण का काम गोवा पत्तन लिमिटेड को सौंपा जाएगा. यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत होगा.’’
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