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झामुमो सांसद रिश्वत कांड, फैसले पर फिर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट!

Updated at : 09 Oct 2014 6:36 AM (IST)
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झामुमो सांसद रिश्वत कांड, फैसले पर फिर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट!

नयी दिल्ली : झामुमो सांसद रिश्वत कांड में 16 साल पहले दिये गये फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करने का मन बना रहा है. राज्यसभा चुनाव में पैसे लेकर वोट देने के आरोपों का सामना कर रही झामुमो विधायक सीता सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले को आधार बना कर विशेष छूट […]

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नयी दिल्ली : झामुमो सांसद रिश्वत कांड में 16 साल पहले दिये गये फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करने का मन बना रहा है. राज्यसभा चुनाव में पैसे लेकर वोट देने के आरोपों का सामना कर रही झामुमो विधायक सीता सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले को आधार बना कर विशेष छूट हासिल करने के लिए याचिका दायर की है.

याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर विचार करने की बात कही है. जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायाधीश आर भानुमति की खंडपीठ ने पैसे लेकर वोट देने या नहीं देनेवाले सांसद संविधान की धारा 105(2) के तहत विशेष छूट के हकदार हैं या नहीं, इस मुद्दे को बड़ी खंडपीठ के पास विचार करने को भेजा है.खंडपीठ ने कहा : चूंकि यह मामला सार्वजनिक महत्ता का है, इसलिए हम इसे बड़ी बेंच के समक्ष विचार के लिए भेज रहे हैं. बड़ी बेंच का गठन मुख्य न्यायाधीश करते हैं.

छूट की मांग की : सीता सोरेन की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण ने शिबू सोरेन मामले का हवाला देते हुए छूट की मांग की थी. याचिका में सीता सोरेन ने संविधान की धारा 194(2) का हवाला देते हुए कहा है कि विधानसभा के अंदर दिये गये वोट या कही गयी बातों को आधार बना कर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.

कुछ दिन पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने 1998 के फैसले पर पुन: विचार करने के सीबीआइ के रुख का समर्थन करते हुए अदालत से कहा कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ते भ्रष्टाचार के मामले को देखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
* हाइकोर्ट ने खारिज कर दी थी सीता सोरेन की याचिका
झारखंड हाइकोर्ट ने सीता सोरेन की विशेष छूट हासिल करनेवाली याचिका खारिज कर दिया था. कहा था कि सीता सोरेन ने जिस व्यक्ति से कथित तौर पर रिश्वत ली, उसके पक्ष में मतदान नहीं किया, ऐसे में वह विशेष छूट पाने की हकदार नहीं हैं. हाइकोर्ट ने कहा था कि कि सांसद रिश्वत कांड में सुप्रीम कोर्ट ने अजीत सिंह के खिलाफ पैसे लेकर वोट नहीं डालने के मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी. झारखंड में 2012 में राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार अग्रवाल का प्रस्तावक बनने के बादले पैसे लेकर और पक्ष में वोट डाले का आरोप सीता सोरेन पर है.
* सांसद रिश्वत कांड में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 1998 को सांसद रिश्वत कांड में फैसला सुनाते हुए नरसिंहा राव की सरकार के पक्ष में पैसे लेकर वोट डालनेवाले सांसदों पर किसी प्रकार की अदालती कार्रवाई से छूट देने के प्रावधान को स्वीकार कर लिया था. पांच सदस्यीय खंडपीठ ने 3-2 से यह फैसला सुनाया था. इस फैसले के बाद रिश्वत लेनेवाले सांसदों की दो श्रेणी बन गयी.
एक जिन्होंने पैसे लेकर सरकार के पक्ष में वोट दिया और दूसरा जिन्होंने पैसे भी लिये, लेकिन वोट नहीं दिया. संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जिन सांसदों ने रिश्वत ली, लेकिन वोट नहीं दिया, उन पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. वे संविधान की धारा 105(2) के तहत सांसदों को मिले विशेषाधिकार के हकदार नहीं हैं. वर्ष 1993 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ झामुमो सांसदों पर पैसे लेकर मतदान करने का आरोप लगा था.
– सीता सोरेन की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाया कदम
* सीता सोरेन ने 1998 में आये फैसले के आधार पर मुकदमा न चलाने की उठायी है मांग
* 2012 में राज्यसभा चुनाव में पैसे लेने का आरोप है सीता सोरेन पर
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