जानें क्या है अमित शाह का मिशन झारखंड?
Author Prabhat khabar digital desk
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नयी दिल्ली : अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को संभालने के बाद चुनावी राज्यों का दौरा कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव वाले राज्य हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद शाह सात सितंबर को झारखंड के दौरे पर रांची पहुंच रहे हैं. शाह ने पहले ही राज्य के नेताओं को लोकसभा चुनाव के 272 प्लस […]
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नयी दिल्ली : अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को संभालने के बाद चुनावी राज्यों का दौरा कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव वाले राज्य हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद शाह सात सितंबर को झारखंड के दौरे पर रांची पहुंच रहे हैं.
शाह ने पहले ही राज्य के नेताओं को लोकसभा चुनाव के 272 प्लस की तर्ज पर राज्य में 47 प्लस का टारगेट दे दिया है. यानी राज्य में भाजपा की स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने के लिए कम से कम विधानसभा की 47 सीटें जितने का लक्ष्य. पार्टी नेता व कार्यकर्ता शाह के इस टॉस्क को पूरा करने के काम में जुटे हैं.
* नेताओं से ज्यादा कार्यकर्ता को देंगे तरजीह
शाह की कार्यशैली पार्टी के बड़े नेताओं से इनपुट लेने की जगह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उनसे इनपुट लेने की है. वे रांची दौरे के दौरान पार्टी के नेताओं से ज्यादा कार्यकर्ताओं को तरजीह देंगे. हरियाणा व महाराष्ट्र की तरह वे झारखंड के भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की पूरी कोशिश करेंगे. वे कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों व कामकाज को जनता तक प्रचारित करने को भी कहेंगे.
* नेताओं को आपसी तालमेल बिठाने की देंगे नसीहत
भाजपा ने अपनी कार्यशैली के विपरीत अबतक किसी को राज्य के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. राज्य में अजरुन मुंड, रघुवर दास अपने-अपने ढंग से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए लाबिंग कर रहे हैं. इसके अलावा कुछ और नेता भी मुख्यमंत्री पद की छुपे तौर पर दावेदारी जताते रहे हैं. कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले शाह को यह अंदाज है कि इन नेताओं की आपसी खींचतान पार्टी को महंगी भी पड़ सकती है. इसलिए अलग-अलग धड़ों को आपसी तालमेल बैठाने व मिलजुल कर काम करने की सलाह देंगे. वे उन्हें ये बतायेंगे कि उनकी गलतियों के कारण पार्टी में निराशा की भावना नहीं आये.
* क्षेत्रीय दलों की ताकत का भी लेंगे जायजा
एक छोटा राज्य होने के बाद भी झारखंड में कई राजनीतिक दल सक्रिय हैं. ये छोटे-छोटे दल भले ही खुद बड़ी राजनीतिक ताकत न बन पायें, लेकिन चुनावी समीकरण को खूब प्रभावित करते हैं. ऐसे में अमित साह इस दलों की ताकत का भी जायजा लेंगे और यह कोशिश करेंगे कि कैसे भाजपा को ताकतवर बनाने में उनकी कमियों का उपयोग किया जाये.
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