पांच महीने में ''चाइल्ड पॉर्नोग्राफी'' के 25,000 मामले, जानिए क्यों देश के लिए चिंताजनक है आंकड़ा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्ली: भारत में चाइल्ड प्रोनोग्राफी के हैरान कर देने वाले आंकड़े सामने आये हैं. अमेरिकी एजेंसी नैशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड द्वारा भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को सौंपे गये आंकड़े के मुताबिक बीते पांच महीने मेें भारत के अलग-अलग राज्यों से चाइल्ड प्रोनोग्राफी से जुड़े तकरीबन 25 हजार कंटेट सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स में अपलोड किए गए हैं. चाइल्ड प्रोनोग्राफी को लेकर गंभीर चर्चा के बीच ये आंकड़े वाकई डराने वाले हैं.

अमेरिका ने साझा किया पूरा आंकड़ा

दरअसल, पिछले साल अमेरिका और भारत के बीच इस तरह का आंकड़ा शेयर करने को लेकर एक समझौता हुआ था. अमेरिकी एजेंसी ने जो आंकड़ा साझा किया है वो बीते 23 जनवरी तक का है. हैरानी की बात है कि चाइल्ड प्रोनोग्राफी से जुड़ा मैटेरियल सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में राजधानी दिल्ली पहले नंबर पर है.

इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है. इसमें एक अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र में ऐसे करीब 1700मामले सामने आये हैं. इन राज्यों ने आंकड़ा सामने आने के बाद से गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू कर दिया है.

जानिए, क्या होती है चाइल्ड प्रोनोग्राफी

गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक केवल इन राज्यों में ही नहीं बल्कि देश भर के अलग-अलग इलाके में दोषियों की पहचान कर गिरफ्तारियां की जा रही हैं. पिछले साल संसद में जब पॉक्सो एक्ट संसोधन विधेयक पास हुआ तब भी महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने चिंता जाहिर की थी. आपको बताते हैं कि चाइल्ड प्रोनोग्राफी क्या होती है.

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज अमेंडमेंट एक्ट (2019) के मुताबिक फोटो, वीडियो, डिजिटल या कम्प्यूटर से बनायी गयी तस्वीरें जो असली बच्चे जैसी दिखती हो या ऐसी तस्वीर जिसे बनाया गया हो, अडैप्ट किया गया हो या मॉडीफाई किया गया हो जो बच्चे जैसा लगता है. चाइल्ड प्रोनोग्राफी की श्रेणी में आता है.

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