भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने फेसबुक के बाद अब ट्विटर के बायो से अपनी पार्टी का नाम हटाया

Updated at : 03 Dec 2019 9:27 AM (IST)
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भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने फेसबुक के बाद अब ट्विटर के बायो से अपनी पार्टी का नाम हटाया

मुंबईः भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने सोमवार को ट्विटर पर अपने ‘बायो’ से अपनी पार्टी का नाम हटा दिया है. इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. रविवार को पंकजा ने महाराष्ट्र में बदले राजनीतिक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में अपनी ‘भावी यात्रा’ के संबंध में सोशल मीडिया पर […]

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मुंबईः भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने सोमवार को ट्विटर पर अपने ‘बायो’ से अपनी पार्टी का नाम हटा दिया है. इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. रविवार को पंकजा ने महाराष्ट्र में बदले राजनीतिक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में अपनी ‘भावी यात्रा’ के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला था जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है.

महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने मीडिया के एक वर्ग में आई उन खबरों का खंडन किया कि वह भाजपा छोड़ सकती हैं. शिवसेना संजय राउत ने भी यह कहकर हलचल बढ़ा दी कि कई नेता उद्धव ठाकरे नीत पार्टी में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं. इस दावे को पाटिल ने खारिज किया. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लिए 28 नवंबर को उन्हें बधाई देने के लिए पंकजा मुंडे का सोमवार रात आभार जताया.

ठाकरे ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया, मैं पंकजा ताई मुंडे का (उनकी शुभकामनाओं) के लिए दिल की गहराई से आभार जताता हूं. महाराष्ट्र विकास आघाडी ‘राज्य के हित को सबसे पहले रखने’ की संस्कृति और परंपरा के हिस्से के रूप में राज्य के हित में काम करेगा और मैं आश्वस्त करता हूं कि महाराष्ट्र का विकास उस स्तर पर करेगा जिसकी कल्पना दिवंगत गोपीनाथ मुंडे ने की थी.

दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में बीड जिले की परली सीट से अपने चचेरे भाई एवं प्रतिद्वंद्वी राकांपा के धनंजय मुंडे से हार गई थीं. पाटिल ने यहां पत्रकारों से कहा कि भाजपा के नेता, पंकजा मुंडे के संपर्क में हैं. वह हार के बाद आत्मनिरीक्षण कर रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह भाजपा छोड़ रही हैं.
पंकजा मुंडे ने 28 नवंबर को तीन ट्वीट किए थे जिनमें महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बधाई दी थी लेकिन शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के बारे में कुछ नहीं लिखा था. वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री थीं. ठाकरे नीत सरकार के गठन से पहले तक वह राज्य भाजपा इकाई की कोर कमेटी की सभी बैठकों में मौजूद रहीं. रविवार को किए गए फेसबुक पोस्ट में पंकजा मुंडे ने अपने समर्थकों को अपने दिवंगत पिता गोपीनाथ मुंडे की जयंती के मौके पर 12 दिसंबर को गोपीनाथगढ़ आने का न्योता दिया था.
गोपीनाथगढ़ बीड जिले में गोपीनाथ मुंडे का स्मारक है. पंकजा ने मराठी में लिखे फेसबुक पोस्ट में कहा, राज्य में बदले राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह सोचने और निर्णय लेने की आवश्यकता है कि आगे क्या किया जाए. मुझे स्वयं से बात करने के लिए आठ से 10 दिन की आवश्यकता है. मौजूदा राजनीतिक बदलावों की पृष्ठभूमि में भावी यात्रा पर फैसला किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, अब क्या करना है? कौन सा मार्ग चुनना है? हम लोगों को क्या दे सकते हैं? हमारी ताकत क्या है? लोगों की अपेक्षाएं क्या हैं? मैं इन सभी पहलुओं पर विचार करूंगी और आपके सामने 12 दिसंबर को आऊंगी.
पंकजा मुंडे ने लिखा कि उन्होंने चुनाव में मिली हार स्वीकार कर ली है और वह हार-जीत में उलझने की जगह आगे बढ़ गई हैं. बता दें कि महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद नई राजनीतिक पटकथा लिखी गई. भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली शिवसेना ने उसके साथ 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ लिया और राकांपा तथा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली.
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