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AyodhyaVerdict: बढ़ाई गई सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सुरक्षा, अतिरिक्त जवानों की हुई तैनाती

Updated at : 11 Nov 2019 11:50 AM (IST)
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AyodhyaVerdict: बढ़ाई गई सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सुरक्षा, अतिरिक्त जवानों की हुई तैनाती

नयी दिल्ली: अयोध्या भूमि विवाद मामले में बीते 09 नवंबर को एतिहासिक फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत, जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ तथा जस्टिस एस अब्दुल नजीर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सुरक्षा जिम्मा संभाल रहे अधिकारी का कहना […]

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नयी दिल्ली: अयोध्या भूमि विवाद मामले में बीते 09 नवंबर को एतिहासिक फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत, जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ तथा जस्टिस एस अब्दुल नजीर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सुरक्षा जिम्मा संभाल रहे अधिकारी का कहना है कि वैसे तो हमें किसी गंभीर खतरे को कोई सूचना नहीं है लेकिन एहतियातन इन न्यायाधीशों की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है.

अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई

सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि पांचो न्यायाधीशों के आवास पर सुरक्षा ड्रिल के तहत अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गयी है. साथ ही, न्यायाधीशों के आवास की तरफ जाने वाली सड़कों में कुछ स्थानों पर बैरिकेटिंग लगाई गयी है और आने-जाने वाले लोगों को सुरक्षा जांच के बाद ही जाने दिया जा रहा है. वैसे तो न्यायाधीशों को आंशिक सुरक्षा मिलती ही है लेकिन अब इसमें मोबाइल कंपोनेंट को भी जोड़ा गया है.

सुरक्षा के लिए साथ चलेंगे एस्कॉर्ट वाहन

जानकारी के मुताबिक अब न्यायाधीशों की गाड़ी के साथ सुरक्षाकर्मियों का भी एक काफिला चलेगा जिसमें एस्कॉर्ट वाहन भी शामिल होंगे. इन एस्कॉर्ट वाहनों में अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस जवान तैनात रहेंगे. बता दें कि जजों की सुरक्षा के लिए वैसे तो पहले भी उनके आवास के बाहर पहरेदार तैनात होते थे लेकिन अब इसमें इजाफा किया गया है.

पांच जजों की पीठ ने सुनाया था फैसला

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सहित पांच जजों के पीठ ने वर्षों से चले आ रहे अयोध्या भूमि विवाद मामले में निर्णायक फैसला सुनाते हुए, विवादित भूमि रामलला विराजमान को सौंपने का फैसला किया वहीं मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही कहीं वैकल्पिक तौर पर पांंच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए देने का निर्देश केंद्र तथा राज्य सरकार को दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाए और मंदिर निर्माण को लेकर नियम बनाए.

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