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‘आरे’ कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से बंबई हाई कोर्ट ने किया इनकार

Updated at : 05 Oct 2019 3:58 PM (IST)
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‘आरे’ कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से बंबई हाई कोर्ट ने किया इनकार

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने मेट्रो कार शेड के लिए मुंबई के प्रमुख हरित क्षेत्र आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से शनिवार को इनकार कर दिया. कुछ हरित कार्यकर्ताओं ने शनिवार को नयी याचिका दायर कर मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) द्वारा इलाके में 2656 पेड़ों को काटे जाने […]

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मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने मेट्रो कार शेड के लिए मुंबई के प्रमुख हरित क्षेत्र आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से शनिवार को इनकार कर दिया. कुछ हरित कार्यकर्ताओं ने शनिवार को नयी याचिका दायर कर मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) द्वारा इलाके में 2656 पेड़ों को काटे जाने पर रोक लगाने की मांग की.

इससे एक दिन पहले उच्च न्यायालय ने मुंबई महानगरपालिका के वृक्ष प्राधिकरण के पेड़ों को काटने की अनुमति देने के फैसले को चुनौती देने वाली गैर लाभकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं की चार याचिकाओं को खारिज कर दिया था, एमएमआरसीएल ने शुक्रवार देर रात को पेड़ काटने शुरू कर दिए और उसकी इस कार्रवाई का हरित कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया. ये कार्यकर्ता आरे कॉलोनी में प्रदर्शन कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं ने अपनी याचिका में एमएमआरसीएल की कार्रवाई पर एक हफ्ते तक रोक लगाने की मांग की ताकि वे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकें.

न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति ए के मेनन ने अर्जी पर तत्काल सुनवाई की. संक्षिप्त दलीलों के बाद पीठ ने रोक लगाने से इनकार कर दिया और उनकी अर्जी का निस्तारण कर दिया. गौरतलब है कि कल रात से आरे कॉलोनो में पेड़ों की कटाई हो रही है. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि आरे जंगल नहीं है और जहां जंगल है, वहां आप पेड़ नहीं काट सकते हैं. कोर्ट के ऐसा कहने के बाद ही आरे में पेड़ों की कटाई शुरू हुई.

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में मेट्रो आज दुनिया में सबसे अच्छी मेट्रो है. बाहर के देशों के लोग यहां आकर मेट्रो को देखते हैं कि इसका विकास कैसे हुआ. जब पहला मेट्रो स्टेशन बना तो 20-25 पेड़ गिराने की जरूरत थी, तो लोगों ने इसका विरोध किया लेकिन एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाये गये और पिछले 15 साल में पेड़ बड़े हो गये हैं.

वहां 271 स्टेशन बने, दिल्ली का जंगल भी बढ़ा, पेड़ भी बढ़े और दिल्ली में तीस लाख लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था हुई. मतलब यही है कि विकास भी और पर्यावरण की रक्षा भी, दोनों साथ में हुये.’ यह पूछने पर कि भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी इन पेड़ों को काटने का विरोध कर रही है, उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, अगर कहीं पेड़ काटे जाते हैं तो उससे अधिक लगाये भी जाते हैं. केंद्रीय पर्यावरण और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर आज शनिवार को लखनऊ में थे.

भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों की जमकर तारीफ करते हुये कहा कि पूरी दुनिया में मंदी है और भारत पर भी इसका कुछ असर हुआ है लेकिन मोदी सरकार लगातार इस पर काम कर रही है. उन्होंने अपने पर्यावरण मंत्रालय के बारे में कहा कि पहले पर्यावरण विभाग से किसी एक परियोजना को पूरा करने में बहुत समय लगता था लेकिन अब ऐसी व्यवस्था की गयी है कि कम से कम समय में सभी अनुमतियां मिल जायें, लेकिन इसके लिए हमने कोई समझौता नहीं किया है, बल्कि नियमों को आसान कर दिया है.

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