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चेन्नई में गहराया जल संकट: कंपनियों का फरमान, पानी नहीं है, घर से करें काम

Updated at : 13 Jun 2019 1:01 PM (IST)
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चेन्नई में गहराया जल संकट: कंपनियों का फरमान, पानी नहीं है, घर से करें काम

नेशनल कंटेंट सेल– घर क्या अब कंपनियों में स्टाफ के लिए नहीं बचा है पानी, कई माह से बारिश नहींचेन्नई के ओल्ड महाबलिपुरम रोड (ओएमआर) स्थित 12 आइटी कंपनियों में काम करने वाले लगभग 5,000 कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है. इसके पीछे कारण है पानी की कमी. कंपनियों ने […]

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नेशनल कंटेंट सेल
– घर क्या अब कंपनियों में स्टाफ के लिए नहीं बचा है पानी, कई माह से बारिश नहीं

चेन्नई के ओल्ड महाबलिपुरम रोड (ओएमआर) स्थित 12 आइटी कंपनियों में काम करने वाले लगभग 5,000 कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है. इसके पीछे कारण है पानी की कमी. कंपनियों ने अपने स्टाफ को कहा है कि उनके पास काम करने लायक भी पानी नहीं है. बताया जा रहा है कि लगभग 200 दिनों से शहर में बारिश नहीं हुई है और अगले तीन महीने तक पानी की कमी से उबरने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. कंपनियों के द्वारा टारगेट के अलावा अगले 100 दिनों तक पानी की कमी से निबटने की भी बड़ी चुनौती है.

पानी की समस्या से निबटने के लिए चेन्नई में पर्याप्त वर्षा जल मौजूद नहीं है. ऐसे में आइटी कंपनियां अपने कर्मचारियों को सुविधानुसार कहीं से ही काम करने की सलाह दे रही हैं. गहराते जल संकट के बीच यहां रहने वाले अधिकांश लोग अपने रिश्‍तेदारों के घर जाना मुनासिब समझ रहे हैं. वहीं, कुछ शहर के दूसरे हिस्‍से में घर बदलकर रहने लगे हैं जहां पानी की सप्‍लाई बेहतर है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चार साल पहले जब निजी टैंकर वालों ने हड़ताल की थी उस समय आखिरी बार कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया था ओएमआर में लगभग 600 आइटी कंपनियां और आइटीइएस कंपनियां हैं जो आइटी पार्क के बाहर तारामणी में स्थित टीआइडीइएल पार्क और सिरुसेरी में स्थित सिपकॉट से संचालित हो रही हैं.

जल आपूर्ति के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर

रवींद्रनाथ ने कहा कि उन्हें जल आपूर्ति के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि सरकारी टैंकरों को दो से तीन हफ्ते लग जाते हैं. निजी आपूर्तिकर्ताओं ने दरों में बढ़ोतरी की है और प्रति ट्रक पानी के लिए 3,000 से 5,000 रुपये की मांग कर रहे हैं.

बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं लोग

कपड़े और बर्तन धोने के लिए पर्याप्त पानी मिलना एक सपना बन गया है. मध्य चेन्नई के एक निवासी कुमार बी दास ने कहा कि वह बोतलबंद पेयजल खरीदने के लिए पैसा खर्च करने के अलावा प्रति माह पानी के टैंकरों पर लगभग 2,500 रुपये खर्च कर रहे हैं. आइटी पेशेवर ने कहा कि मैंने बर्तनों को इस्तेमाल के बाद कपड़े या टिश्यू पेपर से पोंछ कर दोबारा इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. इससे पानी की बचत होती है.

बर्तनों को कपड़े या टिश्यू पेपर से पोंछ कर दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं लोग

200 दिनों से चेन्नई में नहीं हुई है बारिश

100 दिनों तक पानी की कमी से निबटने की है चुनौती 600 आइटी कंपनियां हैं ओएमआर में

03 करोड़ लीटर पानी की जरूरत होती है ओएमआर को गर्मियों में रोजाना

60 प्रतिशत पानी जाता है आइटी कंपनियों और अन्य दफ्तरों में

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