वैदिक- हाफिज मुलाकात, भारत को घेरना चाहता है पाक मीडिया!

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्लीः वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और आतंकी हाफिज सईद की मुलाकात पर विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा. पाक मीडिया भी इस मामले पर भारत को घेरना चाह रहा है. इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है. डॉन टीवी एंकर इफ्तेयार शिरोजी ने कहा कि भारतीय उच्चायोग की सहमति के बगैर वैदिक का हाफिज से मिलना असंभव है. हाफिज एक पत्रकार के तौर पर नहीं भारत के प्रतिनिधि के तौर पर हाफिज से मिले.

एक पत्रकार के लिए हाफिज से मिलना काफी मुश्किल है. दूसरी तरफ सरकार को दोनों सदनों में इस पूरे मामले पर सफाई देनी पड़ी. अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि वेद प्रताप वैदिक और हाफिज सईद की मुलाकात का सरकार से कोई लेना देना नहीं है. सुषमा स्वराज ने इस मुलाकात की निंदा करते हुए कहा कई सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल पाक गया था. इसके कुछ लोगों तीन दिन का वीजा मांगा तो किसी 15 दिन का वीजा मांगा और इस अवधि तक वहां रहे. वीजा देने का काम पाकिस्तान सरकार का है इसमें भारत किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करता इसमें न तो कोई छुपा हुआ एजेंडा है और न ही कोई बैक चैनल बातचीत. सरकार ने इस मामले पर सफाई देते हुए भारतीय उच्चायोग से मांगी गई है. सुषमा ने सफाई देते हुए स्पष्ट रुप से कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार इस पूरे मामले पर पूरी तरह अपनी बात रख पायेगी.विपक्ष ने भी सरकार को घेरने का मन बना लिया है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया.

पाकिस्तानी मीडिया ने कहा, वैदिक भारत के प्रतिनिधि थे

डॉन टीवी के पत्रकार इफ्तेयार शिरोजी ने इस मामले में नया खुलासा किया है. एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान शिरोजी ने कहा, वैदिक ने यहां अपना परिचय पत्रकार के रूप में नहीं बल्कि भारत के प्रतिनिधि के रूप में दिया था. इसी पत्रकार ने पाकिस्तान में वैदिक का इंटरव्यू लिया था. इस इंटरव्यूं में वैदिक ने कश्मीर की आजादी का समर्थन किया था. शिरोजी ने कहा कि वैदिन जितने भी पाकिस्तान में रहे उन्होंने यहां मुझे हरएक मुलाकात की जानकारी दी.

लेकिन हाफिज से मुलाकात की जानकारी नहीं दी जिस दिन वह लाहौर से वापस जा रहे थे उस दिन भी उन्होंने फोन किया लेकिन हाफिज से मुलाकात की बात नहीं बतायी. शिरोजी ने साफ किया कि एक पत्रकार के लिए हाफिज से मिलना बेहद कठिन है अगर कोई पत्रकार चाहे तो उनसे मुलाकात नहीं कर सकता लेकिन भारत के प्रतिनिधि के तौर पर अगर कोई मिलना चाहे तो किसी ने वैदिक की मुलाकात हाफिज से करा दी होगी. शिरोजी ने इस पूरे मामले पर भारतीय उच्चायोग की जानकारी ना होने पर भी सवाल खड़ा किया उन्होंने कहा कि वैदिक यहां जिस तरह से यहां भारतीय उच्चायोग से संपर्क में थे इससे साफ है कि भारतीय उच्चायोग को इसकी पूरी जानकारी थी.

सरकार की क्यूं हो रही है फजीहत

वेद प्रताप वैदिक पत्रकार के साथ- साथ राजनैतिक तौर पर अपने विचार स्पष्ट रुप से रखने के लिए जाने जाते है. उन्होंने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की घोषणा पहले ही कर दी थी. कई मंचो पर भाजपा के दिग्गज नेताओं ने वैदिक के साथ मंच साझा किया और वैदिक ने खुलकर इनका समर्थन किया. इसके अलावा वैदिक बाबा रामदेव के करीबी माने जाते है. रामदेव ने भी वैदिक का इस पूरे मामले में बचाव किया. उन्होंने यहां तक कह दिया अगर वैदिक ने अगर हाफिज से मुलाकात की तो उनके ह्रदय परिर्वतन की योजना से मिले होंगे. इस तरह के बयान के बाद सरकार घिरती जा रही है.

सरकार ने की मुलाकात की निंदा

हाफिज से वैदिक की मुलाकात का सरकार ने कड़ा विरोध किया है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मुलाकात की निंदा करते हुए कहा कि हम इस मुलाकात की भर्त्सना करते हैं. कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने जिस तरह की बात कही है हम उससे खूद को अलग करते हैं. यह मुलाकात हमारी जानकारी के बगैर हुई है. वैदिक की यह मुलाकात पूरी तरह निजी है.

15 दिन पाक में रहे वैदिक

वेद प्रताप वैदिक 15 दिनों का वीजा लेकर पाकिस्तान में रहे. इस दौरान उन्होंने यहां के कई टीवी चैनल को साक्षात्कार दिया. इस दौरान वैदिक लगातार भारत और पाकिस्तान के संबंध बेहतर करने पर बातचीत करते रहे साथ ही कश्मीर जैसे गंभीर मुद्दों पर भी उन्होंने पाकिस्तान में अपनी राय रखी वैदिक ने कहा कि कश्‍मीर,भारत और पाकिस्‍तान के लिए अहम है,‍लेकिन इस मामले में दोनों देशों को पहल करने की जरूरत है. उन्‍होंने कहा कि इस मामले में भारत को बड़ा दिल दिखाना चाहिए. वैदिक ने कश्‍मीर विवाद को सुलझाने का एक उपाय भी सुझा दिया, उन्‍होंने कहा कि दोनों कश्‍मीर को मिलाकर कश्‍मीर को आजाद कराना चाहिए.

वैदिक का पक्ष

वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक हाफिज से मुलाकात को एक पत्रकार की मुलाकात बता रहे है. उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को इतनी आजादी होती है कि वह किसी आतंकी से मुलाकात कर सके. मैं उससे भारत के प्रतिनिधि के रुप में नहीं मिला. मैंने उससे एक पत्रकार के रुप में मुलाकात की है और इस पर एक पूरी रिपोर्ट जल्दी ही अखबार में प्रकाशित होगी.

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