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चुनावी सभाओं से खूब कमाई कर रहे प्रवासी श्रमिक, चेहरा ढक कर प्रचार करने की मजबूरी, जान की है परवाह

Updated at : 03 Apr 2019 5:42 AM (IST)
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चुनावी सभाओं से खूब कमाई कर रहे प्रवासी श्रमिक, चेहरा ढक कर प्रचार करने की मजबूरी, जान की है परवाह

अनिल एस साक्षी जम्मू : कश्मीर में हो रहे चुनावों में प्रचार और चुनावी सभाओं के दौरान एकत्र भीड़ पर अगर ध्यान दिया जाये, तो दो बातें साफ नजर आती हैं. पहली कि अधिकतर कार्यकर्ता पहचान बचाने की खातिर अपने चेहरों को ढक रहे हैं. दूसरा कि कश्मीर में बचे-खुचे प्रवासी श्रमिक आज खूब कमाई […]

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अनिल एस साक्षी
जम्मू : कश्मीर में हो रहे चुनावों में प्रचार और चुनावी सभाओं के दौरान एकत्र भीड़ पर अगर ध्यान दिया जाये, तो दो बातें साफ नजर आती हैं. पहली कि अधिकतर कार्यकर्ता पहचान बचाने की खातिर अपने चेहरों को ढक रहे हैं.
दूसरा कि कश्मीर में बचे-खुचे प्रवासी श्रमिक आज खूब कमाई इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ‘राजनीतिक कार्यकर्ताओं’ के रूप में चुनावी सभाओं में शामिल होने के अच्छे खासे पैसे मिल रहे हैं.
जान बचाने की चिंता में कश्मीर में चुनाव प्रचार और चुनावी सभाओं में भाग लेने वाले अपनी पहचान जाहिर करने का साहस नहीं करते. वे चेहरा ढक लेते हैं. चेहरा ढकने वालों ने भी इसे प्रचार का रूप दे दिया हुआ है. वे अपने चेहरे को पार्टी के झंडे और बैनरों से ढक कर जहां पार्टी प्रचार कर रहे हैं, वहीं पहचान छुपा का जान बचा रहे हैं. 1996 के विधानसभा चुनाव में ऐसे लोग बहुत ही कम दिखते थे, जिन्होंने अपने चेहरों को ढका हुआ था.
2002 के विधानसभा चुनावों व 2004 तथा 2014 के लोकसभा चुनावों में भी इसका प्रचलन बढ़ा था. इस बार के चुनाव में प्रचार और चुनावी सभाओं में भाग लेने वाला हर चौथा आदमी आपको चेहरे को ढ़के हुए दिख रहा है. दरअसल, उनकी चिंता आतंकवादी कहर से बचने की है. आतंकी ऐसे लोगों की तस्वीर अखबारों और न्यूज चैनलों से हासिल करते हैं. लिहाजा, लाेग चुनावी सभाओं के दौरान फोटोग्राफरों को फोटो लेने से रोकते हैं.
यह बात अलग है कि उनके निवेदन को राज्य के बाहर से आने वाले टीवी चैनलों के कैमरामैन या अखबारों के फोटोग्राफर अनदेखा कर रहे हैं, लेकिन राज्य के भीतर काम करने वाले कैमरामैन इस सच्चाई को जानते हैं. लिहाजा, वे खुद भी तस्वीर को खींचने से पहले लोगों को अपने चेहरों को ढक लेने को कहते हैं.
हेलीकॉप्टर से प्रचार, मतदाताओं से अधिक होंगे मतदानकर्मी
बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख में होने जा रहे लोकसभा चुनाव पूरी तरह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर पर निर्भर हैं. चुनाव सामग्री और कर्मियों को गंतव्य तक पहुंचाने से लेे कर प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार तक वायुसेना के हेलीकॉप्टर पर निर्भर है. कई मतदान केंद्र हजारों फीट की ऊंचाई पर हैं.
एक मतदान केंद्र ऐसा भी है, जहां मतदाताओं से ज्यादा संख्या मतदानकर्मियों की होगी. जिले के 17 मतदान केंद्र समुद्रतल से 10 हजार से लेकर 16000 फीट की ऊंचाई पर हैं. इनमें से 12 केंद्र लेह में हैं और पांच करगिल में हैं. 6 मई को लद्दाख के लोकसभा क्षेत्र में मतदान होना है. यह सभी इलाके सर्दियों में बर्फ के गिरने के कारण शेष विश्व से कम से कम छह माह के लिए कट जाते हैं.
434 किमी लम्बा श्रीनगर-लेह राजमार्ग भी अभी बंद है जिसके मतदान से पहले खुलने की उम्मीद लगायी जा रही है. इसके लिए वायुसेना के चीता हेलीकॉप्टर सेवा में लगाये जा रहे हैं. ऊंचाई वाले 17 मतदान केंद्रों तक चुनाव सामग्री और कर्मी पहुंचाने के लिए एक-एक चीता हेलीकाॅप्टर को कम-से-कम चार बार उड़ानें भरनी होंगी.
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