अच्छे दिनों की उम्मीद में कट गये तीस दिन

Updated at : 26 Jun 2014 5:54 PM (IST)
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अच्छे दिनों की उम्मीद में कट गये तीस दिन

नयी दिल्लीः नरेंद्र मोदी की सरकार के तीस दिन पूरे हो गये हैं. अगर इन तीस दिनों के कामकाज को देखें, तो सरकार ने काफी कम समय में कई महत्वपूर्ण फैसले लिये हैं.महंगाई के नियंत्रण और अच्छे दिनों के वादे के साथ बनीं नयी सरकार पर लोग बहुत उम्मीदें रखते हैं. लेकिन सरकार ने जिस […]

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नयी दिल्लीः नरेंद्र मोदी की सरकार के तीस दिन पूरे हो गये हैं. अगर इन तीस दिनों के कामकाज को देखें, तो सरकार ने काफी कम समय में कई महत्वपूर्ण फैसले लिये हैं.महंगाई के नियंत्रण और अच्छे दिनों के वादे के साथ बनीं नयी सरकार पर लोग बहुत उम्मीदें रखते हैं. लेकिन सरकार ने जिस तरह से रेल भाड़ा और चीनी के दाम बढ़ाये उससे लोगों को निराशा हाथ लगी.

हालांकि मोदी सरकार अपने कार्य की समीक्षा के लिए पांच सालों का वक्त चाहती है. लेकिन उनके एक महीने के कामकाज पर भी चर्चा होने लगी है. भारतीया जनता पार्टी ने यूट्यूब पर सरकार के तीस दिन के कामकाज का लेखाजोखा एक वीडियो के जरिये लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है. इस वीडियो में शपथग्रहण समारोह से लेकर प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा तक के सभी पहलुओं को छूने की कोशिश की गयी है. हालांकि इस वीडियो को देखने के बाद आप इसका बेहतर अंदाजा लगा सकता है कि सरकार ने इन तीस दिनों में कितना काम किया.

सत्ता में आते ही पुरानी सरकार में फैसला लेने से हिचक रहे अधिकारियों को यह भरोसा दिया गया कि अगर आपकी मंशा सही हो, तो उसके पीछे पूरी सरकार खड़ी रहेगी. आप निडर होकर फैसले ले सकते हैं. मोदी सरकार ने अपना कैबिनेट छोटा रखा और मंत्रियों के स्टॉफ में निजी सगे संबंधियों को रखने पर पाबंदी लगा दी गयी.

कैबिनेट के कई दिग्गज नेता अपनी पसंद का स्टॉफ नहीं रख पा रहे हैं. सरकार में नंबर दो का स्थान रखने वाले राजनाथ सिंह भी मनपसंद निजी स्टाफ नहीं रख पा रहे हैं. दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है. रेल किराये में हुई बढोतरी को लेकर सभी विपक्षी पार्टियों ने जमकर विरोध किया. बजट में कठोर कदमों के संकेत ने भी विपक्ष को हमले का मौका दे दिया है. सरकार इस बढोतरी को लेकर कई तर्क दे रही है. मोदी खजाने की हालत का इजहार करते हुए भरोसा दे चुके हैं कि देश हित के लिए यह जरूरी है.

सरकार काले धन को लकर भी काफी गंभीर दिख रही है. मोदी ने शपथग्रहण समारोह में शार्क देशों को निमत्रंण देकर विदेश नीति का भी ध्यान रखा. हालांकि पाकिस्तान और भारत के संबंध को लेकर अभी भी सवालिया निशान बना हुआ है. लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान ने भारतीय मुछआरों को रिहा किया और शरहद पार से तोहफों का लेन देन शुरु हुआ है इससे दोनों देशों के बीच एक रिश्तें की कहानी बयां होती है.

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