क्या सरकार के इशारे पर काम कर रही है यूजीसी ?

Updated at : 24 Jun 2014 9:28 PM (IST)
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क्या सरकार के इशारे पर काम कर रही है यूजीसी ?

-इंटरनेट डेस्क- नयी दिल्लीः चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लेकर यूजीसी और डीयू के बीच विवाद बढता जा रहा है. हर दिन मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है. जहां एक ओर दिल्ली विश्वविद्यालय अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है वहीं यूजीसी भी अपने निर्णय पर अडिग है. कल इस विवाद […]

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-इंटरनेट डेस्क-

नयी दिल्लीः चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लेकर यूजीसी और डीयू के बीच विवाद बढता जा रहा है. हर दिन मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है. जहां एक ओर दिल्ली विश्वविद्यालय अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है वहीं यूजीसी भी अपने निर्णय पर अडिग है. कल इस विवाद को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ भी डीयू और यूजीसी अधिकारियों के साथ बातचीत हुई किन्तु मामला नहीं निपटाया जा सका.

आज डीयू के वीसी दिनेश सिंह की इस्तीफे की खबरें भी आयी लेकिन बाद में कहा गया है कि इस तरह की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. उधर वरिष्ठ पत्रकार मधु किश्वर ने यह कहकर और सनसनी फैला दी है कि यूजीसी के अधिकारी वीसी पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं. किश्वर ने सरकार पर भी आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर डीयू के वीसी मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से मिलने गये थे लेकिन वह उनसे नहीं मिली जबकि यूजीसी के अध्यक्ष दो-दो बार उनसे मुलाकात कर चुके हैं.

कौन हैं मधु किश्वर

मधु पूर्णिमाकिश्वर एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्होंने दिल्ली के मिरांडा हाउस से पढ़ाई की है. यह वहां पर स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष भी रही हैं. किश्वर ने जेएनयू से इतिहास की शिक्षा भी ग्रहण की है. किश्वर 1979 से महिलाओं के लिए ‘मनुषी’ नाम से एक पत्रिका निकालती है और यह इस पत्रिका की संस्थापक संपादक है.

ज्ञात हो कि 2013 में मधु किश्वर ने ‘मोदीनामा’ नाम से एक लेख लिखी थी जिसमें उसने मीडिया की 2002 और उसके बाद भी मोदी का झूठा गुणगान करने को लेकर आलोचना की थी. इसको लेकर किश्वर की असामाजिक तत्वों ने आलोचना की थी एवं उनपर हमले भी हुए थे.

क्यों अचानक बदल गये यूजीसी के सुर

यूजीसी के तेवर को देखते हुए और सरकार का इसके प्रति उदासीन रवैया को देखकर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है. सरकार ने इस मामले में साफ तौर पर अपना पल्ला झाडते हुए कहा कि यह डीयू यूजीसी के बीच का मामला है इसमें वह दखलअंदाजी नहीं कर सकती. साथ ही उसने यूजीसी को सुप्रीमो बताया और कहा कि डीयू को यूजीसी की बात मान लेनी चाहिए.

एक टीवी चैनल में चले वीडियो क्लिप में यूजीसी के अध्यक्ष वेद प्रकाश को यह कहते हुए दिखाया गया है कि दिनेश के मार्गदर्शन में डीयू काफी अच्छा कर रहा है अंत में उन्होंने यह भी कहा है कि दिनेश को मेरी उमर लग जाए. यह वीडियो क्लिप इसी वर्ष फरवरी माह का है जिस वक्त यूपीए की सरकार थी. अब सवाल है कि चार महीने में ही सरकार बदलते हीं यूजीसी के तेवर क्यों बदल गये. वही चेयरमेन अब वीसी को धमकी क्यों देने लगे हैं, उनपर इस्तीफे का दबाव क्यों बना रहा है? यह बडा सवाल है.

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