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सुप्रीम कोर्ट के किन फैसलों पर होगी नजर, किस फैसले ने बदला इतिहास

Updated at : 02 Jan 2019 12:02 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट के किन फैसलों पर होगी नजर, किस फैसले ने  बदला इतिहास

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट कई मामलों पर अहम फैसला सुनाने वाला है, जिनमें अयोध्या जमीन विवाद से लेकर 1984 के सिख दंगा तक शामिल है. नये साल में चार बेहद महत्वपूर्ण फैसले हैं जिस पर पूरे देश की नजर है. इन मामलों में इस साल चर्चा में रहे CBI बनाम CBI मामले में भी […]

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साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट कई मामलों पर अहम फैसला सुनाने वाला है, जिनमें अयोध्या जमीन विवाद से लेकर 1984 के सिख दंगा तक शामिल है. नये साल में चार बेहद महत्वपूर्ण फैसले हैं जिस पर पूरे देश की नजर है. इन मामलों में इस साल चर्चा में रहे CBI बनाम CBI मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है. साल 2018 में कई फैसले अहम रहे. इन फैसलों ने भी देश की दिशा और सोच बदली. नये फैसलों का इंतजार है तो पुराने फैसलों से आये बदलाव को हम सभी महसूस कर रहे हैं. नये साल में आइये पहले जानते हैं किन फैसलों पर है सबकी नजर.

अयोध्या जमीन विवाद – इस मामले में 4 जनवरी को सुनवाई होने वाली है हांलाकि इस सुनवाई में इस पर फैसला होगा कि कौन सी बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी और कब से. इस मामले को संवैधानिक बेंच में भेजने पर मना किया था इस मामलों को जमीन विवाद की तरह सुलझाने पर सहमति हो रही थी. इस मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने इस्माइल फारुखी मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फैसले पर दोबारा परीक्षण की जरूरत पर जोर दिया था. इस मामले का इंतजार लंबे अरसे से हो रहा है ऐसे में जल्द से जल्द इस पर फैसला देने का भी दबाव बन रहा है.
सीबीआई विवाद कोर्ट में- देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब शीर्ष पद पर बैठे दो अधिकारियों के बीच विवाद को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. सरकार ने दोनों अधिकारियों राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया है और अंतरिम निदेशक के पद एम नागेश्वर की नियुक्ति कर दी है. CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. इस अर्जी में CBI की स्वतंत्रता में सरकार के आदेश को दखल बताया. अर्जी में कहा गया कि उन्हें डायरेक्टर के कार्यभार से वंचित करना और किसी और को कार्यभार देने का सरकार और CVC का फैसला अवैध है, जिसे खारिज किया जाए.
राफेल को लेकर याचिका खारिज, हलफनामा पर विचार – 14 दिसंबर को राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी . इस मामले में केंद्र की ओर से दायर हलफनामा पर सुनवाई हो सकता है. राफेल डील में फैसले के पैरा 25 के कंटेंट में बदलाव के लिए केंद्र ने आवेदन दिया है. केंद्र ने कहा, पैराग्राफ में ग्रामर में हुई गलतफहमी के कारण विवाद उठा है इसे ठीक किया जाए. मामला यह है कि कोर्ट ने अपने फैसले के पैरा 25 में सीएजी के साथ रिपोर्ट साझा करने के केंद्र की बात पर कांग्रेस ने सवाल उठाया. जिसमें लिखा गया , सरकार ने जो मटीरियल पेश किया है, उसके मुताबिक राफेल की कीमत CAG के साथ साझा की गई और CAG रिपोर्ट PAC को दी गई थी। कांग्रेस ने केंद्र पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि PAC के पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई.
सिख दंगा- सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिली है. इस फैसले पर सज्जन ने सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी है. नये साल में इस पर फैसला आ सकता है.
नये साल में यह चार अहम मुद्दों पर फैसला आना संभव है लेकिन साल 2018 में कई ऐसे फैसले हुए. आइये जानते हैं कौन से थे अहम फैसले
दिल्ली सरकार ही दिल्ली की मालिक – 4 जुलाई को दिल्ली सरकार और एलजी मामले में फैसला आया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा, एलजी की मनमानी नहीं चलेगी और हर मामले में फैसले से पहले एलजी की सहमति की जरूरत नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार महत्वपूर्ण है.
आधार पर फैसला – आधार कार्ड को लेकर एक बहस छिड़ी थी. इसकी जरूरत और अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को फैसला सुनाया. आधार को कुछ शर्तों के साथ वैध बताया गया. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी सुनवाई है, इससे पहले 1973 में मौलिक अधिकारों को लेकर केशवानंद भारती केस की सुनवाई करीब पांच महीने चली थी. फैसले के बाद स्कूल,कालेज,छात्रों के लिए आधार की जरूरत नहीं होगी, बैंक खातों से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं होगा, सिम के लिए आधार की मांग नहीं की जा सकती और निजी कंपनियां आधार डाटा नहीं रख सकती.
समलैंगिकता पर अहम फैसला – समलैंगिकता पर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया. इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया सुनाए गये इस फैसले में धारा 377 को रद्द कर दिया गया . सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि एलजीबीटी समुदाय को भी समान अधिकार है.
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