रेल भाड़े में बढ़ोतरी से देश भर में विरोध प्रदर्शन, जेटली ने बताया किराये में वृद्धि का सच

नयी दिल्लीः रेलवे किराये में वृद्धि को लेकर देश में हंगामा मचा हुआ है. वृद्धि पर सरकार का बचाव करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली आगे आये हैं. जेटली ने फेसबुक के जरिए ‘रेलवे किराये में वृद्धि का सच’ शीर्षक से लिखा है कि पिछले कुछ सालों से भारतीय रेल घाटे में चल रही […]
नयी दिल्लीः रेलवे किराये में वृद्धि को लेकर देश में हंगामा मचा हुआ है. वृद्धि पर सरकार का बचाव करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली आगे आये हैं. जेटली ने फेसबुक के जरिए ‘रेलवे किराये में वृद्धि का सच’ शीर्षक से लिखा है कि पिछले कुछ सालों से भारतीय रेल घाटे में चल रही थी. मौजूदा वृद्धि रेलवे में यात्रियों की सुविधाएं बढाने के उद्देश्य से की गयी है.
https://www.facebook.com/ArunJaitley/posts/247158712139351जेटली ने कहा है कि रेलवे का अस्तित्व तभी बचेगा अगर यात्री सुविधाओं के लिए भुगतान करें. यात्री किराये व माल भाडे में वृद्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये जेटली ने कहा, यात्री सेवाओं के लिये माल भाडे से सब्सिडी दी जाती है. बीते कुछ वषों में माल भाडा भी दबाव में आ गया. उन्होंने कहा कि सरकार के पास यही विकल्प था कि यो तो वह रेलवे को उसके हालात पर छोड दे और अंतत: इसे ऋण जाल में फंसने दे या किराया बढाए.
जेटली ने कहा कि 5 फरवरी 2014 को यूपीए सत्ता में थी. उस वक्त रेलवे बोर्ड ने माल भाडे में 5 फीसदी व यात्री किराये में 10 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव किया था. माल भाड़े को 1 अप्रैल से व यात्री भाड़े को 1 मई से लागू करना था. उस वक्त बताया गया कि इस वृद्धि से रेलवे को 7900 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. इसी सिलसिले में तत्कालीन रेल मंत्री खडगे ने मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी. और लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद 16 मई को ही यूपीए सरकार ने रेल भाडे में वृद्धि की घोषणा की थी, जिस दिन लोकसभा चुनाव के परिणाम आये थे और कांग्रेस को करारी हार मिली थी. जेटली ने फेसबुक में लिखा है कि उसी घोषणा को निरस्त करते हुए वर्तमान रेल मंत्री सदानंद गौडा ने एक कठिन फैसला लिया है. गौडा के पास दो ही उपाय थे या तो वह यूपीए द्वारा चलाये जा रहे नीति के अनुसार रेलवे को गर्त में डूब जाने दे या फिर उसके उत्थान के लिए कठिन फैसला लिया जाय. अंततः गौडा ने कठिन किन्तु देश हित में फैसला लिया है.
जेटली ने कहा, भारत को यह फैसला करना होगा कि उसे विश्व स्तरीय रेलवे चाहिए या घिसीपिटी खस्ताहाल सेवाएं. जेटली ने कहा, रेल मंत्री ने कठिन लेकिन सही फैसला किया है. भारतीय रेलवे पिछले कुछ साल से घाटे में चल रही है. रेलवे को बचाने का एक ही तरीका है कि यात्री जिन सुविधाओं का लाभ उठाते हैं उनके लिये भुगतान करें.
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