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पीएम मोदी ने देश के सबसे लंबे पुल ‘बोगीबील ब्रिज’ का उद्‌घाटन किया

Updated at : 25 Dec 2018 2:27 PM (IST)
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पीएम मोदी ने देश के सबसे लंबे पुल ‘बोगीबील ब्रिज’ का उद्‌घाटन किया

डिब्रूगढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे पुल बोगीबील का उद्घाटन मंगलवार को कर दिया है. इस पुल पर ट्रेन और गाड़ियां एक साथ ऊपर-नीचे चलेंगी. असम के डिब्रू गढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह पुल एक संयुक्त रेल-रोड ब्रिज है जिस पर ट्रेन भी चलेगी और गाड़ियां भी.नयी दिल्ली से […]

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डिब्रूगढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे पुल बोगीबील का उद्घाटन मंगलवार को कर दिया है. इस पुल पर ट्रेन और गाड़ियां एक साथ ऊपर-नीचे चलेंगी. असम के डिब्रू गढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह पुल एक संयुक्त रेल-रोड ब्रिज है जिस पर ट्रेन भी चलेगी और गाड़ियां भी.नयी दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4.94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया. लोगों का अभिवादन करने के बाद मोदी कार से उतरे और असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले. प्रधानमंत्री ने ब्रहमपुत्र के उत्तरी किनारे पर अपने काफिले के साथ पुल को पार किया जहां वह तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायेंगे. यह ट्रेन एक सप्ताह में पांच दिन चलेगी.

बनकर तैयार है बोगीबील पुल, जानें क्या है खासियत

इस पुल से असम में तिनसुकिया और अरूणाचल प्रदेश के नाहरलागुन के बीच ट्रेन की यात्रा का समय 10 घंटे से अधिक तक कम हो जायेगा. मोदी के दिन में धेमाजी जिले में एक जनसभा को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है. विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल अरूणाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए कई तरह से मददगार होगा. डिब्रूगढ़ से शुरू होकर इस पुल का समापन असम के धेमाजी जिले में होता है. यह पुल अरुणाचल प्रदेश के भागों को सड़क के साथ-साथ रेलवे से जोड़ेगा. असम समझौते का हिस्सा रहे बोगीबील पुल को 1997-98 में मंजूरी दी गई थी. ऐसा माना जा रहा है कि यह पुल अरूणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा.

पुल के उद्‌घाटन के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यह देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है. यह देश का पहला पूरी तरह से स्टील से बना रेल-रोड ब्रिज है. यह पुल सिर्फ एक पुल नहीं है बल्कि यह इस क्षेत्र के लाखों लोगों के जीवन को जोड़ने वाली लाइफलाइन है. इससे असम और अरुणाचल के बीच की दूरी सिमट गई है.

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है. गरीब का, शोषित का, वंचित का अगर सबसे ज्यादा कोई नुकसान करता है, तो वो है भ्रष्टाचार. भ्रष्टाचार, गरीब से उसका अधिकार छीनता है, उसका जीवन मुश्किल बनाता है. इसलिए मेरी सरकार भ्रष्टाचार मिटा रही है.


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इसके क्रियान्वयन में देरी के कारण इस परियोजना की लागत 85 प्रतिशत तक बढ़ गई. इसकी अनुमानित लागत 3,230.02 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर 5,960 करोड़ रुपये हो गई. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि इस पुल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सैनिकों को दक्षिणी किनारे से उत्तरी किनारे जाने में आसानी होगी.

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