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चुनावी समीकरण : राजस्थान में 31 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस ने उतारे एक ही जाति के उम्मीदवार

Updated at : 23 Nov 2018 5:38 PM (IST)
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चुनावी समीकरण : राजस्थान में 31 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस ने उतारे एक ही जाति के उम्मीदवार

जयपुर : राजस्थान विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की जीत में जातिगत समीकरण मुख्य कारक रहा है. यही कारण है कि दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों ने इस बार 200 विधानसभा सीटों में से 31 विधानसभा सीटों पर एक ही यानी समान जाति के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं. दोनों पार्टियों ने टिकट वितरण के दौरान […]

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जयपुर : राजस्थान विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की जीत में जातिगत समीकरण मुख्य कारक रहा है. यही कारण है कि दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों ने इस बार 200 विधानसभा सीटों में से 31 विधानसभा सीटों पर एक ही यानी समान जाति के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं. दोनों पार्टियों ने टिकट वितरण के दौरान जातिगत समीकरणों का विशेष तौर पर ध्यान रखा है. दोनों पार्टियों ने जाट समुदाय के 33 उम्मीदवारों को पार्टी के टिकट दिये हैं.

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इस चुनाव में सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने 26 राजपूत और कांग्रेस ने 15 राजपूत उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं, दोनों पार्टियों ने टिकट वितरण में ब्राह्मण, वैश्य, ओबीसी और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को उचित प्रतिनिधित्व देने पर ध्यान रखा है. कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीरवारों को पार्टी का टिकट दिया है. वहीं, भाजपा ने केवल एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है. दोनों ही पार्टियों ने 60 से अधिक अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को टिकट वितरित किये हैं.

राजनैतिक पंडितों के अनुसार, राजनैतिक पार्टियों ने टिकट वितरण में जातिगत समीकरणों को दिमाग में रखकर टिकटों का वितरण किया है. वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी ने कहा कि जातिगत बाहुल्य समाज, जैसे जाटों, के मजबूत नेता वोट को अपनी ओर खींचने में मदद कर सकता है, लेकिन कांग्रेस को भाजपा सरकार के सत्ता विरोधी मुद्दे, राजपूत और अन्य प्रभावशाली समाज के ऐसे उम्मीदवार, जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया है, का लाभ स्वत: मिल जायेगा.

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षो से भाजपा शहरी और ग्रामीण राजपूत समाज के मतदाताओं के समर्थन का आंनद उठा रही थी, लेकिन संभावित निष्ठा बदल जाने के बाद जातिगत समीकरणों में कुछ बदलाव दिखायी दे रहा है. मामूली वोट शेयर के बदलने से समीकरण कांग्रेस के पक्ष में हो सकते है. चुनाव आयोग के आंकडों के अनुसार, वर्ष 2013 में कांग्रेस के 33.7 फीसदी वोट शेयर के मुकाबले में भाजपा का वोट शेयर 46.05 फीसदी था, जबकि वर्ष 2008 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 36.82 फीसदी वोट शेयर के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 34.27 फीसदी था.

कांग्रेस और भाजपा ने 31 सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं. 15 सीटों पर जाट समाज के उम्मीवारों का सीधा मुकाबला है. वहीं, सात सीटों पर ब्राह्मण समाज के उम्मीदवारों, चार सीटों पर राजपूत समाज के उम्मीदवारों और दो-दो सीटों पर गुर्जर और यादव समाज के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है. चुनाव लड़ने वाले प्रमुख जाट नेताओं में सूरतगढ़ सीट पर भाजपा के राम प्रताप कसनिया का मुकाबला कांग्रेस के हनुमान मील के साथ वहीं हनुमानगढ़ सीट पर भाजपा के डॉ राम प्रताप कांग्रेस के विनोद चौधरी से सादुलपुर सीट पर रामसिंह कंसवा का कृष्णा पुनिया के साथ मुकाबला है.

प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीकानेर (पश्चिम) पर ब्राह्मण नेताओं का दिलचस्प मुकाबला होगा. भाजपा के गोपाल जोशी को कांग्रेस के बीडी कल्ला के बीच सीधा मुकाबला है. वहीं, रतनगढ सीट पर भाजपा के अभिषेक महर्षि का मुकाबला कांग्रेस के भंवरलाल के साथ होगा.

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